बिहार में जनादेश की बहार में 'नीतीशे कुमार' पर जनता ने एक बार फिर ऐतबार जता दिया है। अपनी सेहत और नेतृत्व पर महागठबंधन की तरफ से उठते सवालों के बावजूद नीतीश कुमार जनता की पसंद बने रहने में कामयाब हुए। 'तेजस्वी का प्रण' काम नहीं आया। प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी भी बेअसर साबित हुई।
इस चुनाव में नीतीश कुमार और उनके नेतृत्व की सबसे ज्यादा चर्चा रही, राजनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण राज्यों में से एक बिहार में चुनाव इसलिए भी खास रहें। क्योंकि यहां नीतीश कुमार लंबे समय से सत्ता में हैं।
नीतीश कुमार 2000 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कहने पर बिहार के मुख्यमंत्री बने थे। बाद के वर्षों में उन्होंने गठबंधन बदले, लेकिन सत्ता उनके इर्द-गिर्द ही रही। अब तक नीतीश कुल नौ बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके हैं। 2020 के बाद से ही वे तीन बार शपथ ले चुके थे। अब 10वीं बार की तैयारी में हैं।