मध्यप्रदेश के उमरिया जिले में इस बार होली का रंग हर्बल गुलाल की खुशबू से महकेगा। सरस्वती आजीविका स्व सहायता समूह की अध्यक्ष राधा सिंह और उनकी टीम ने मुदरिया गाँव में पलाश, गुलाब, गुड़हल और पालक से प्राकृतिक गुलाल तैयार किया है। इस पहल का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना और लोगों को हानिकारक रसायनों से मुक्त, सुरक्षित गुलाल उपलब्ध कराना है। यह गुलाल पूरी तरह प्राकृतिक और त्वचा के लिए भी सुरक्षित है।
ये भी पढ़ें- उज्जैन की अनोखी होली, चकमक पत्थर से दहन, तीन हजार वर्ष पुरानी परंपरा, राजा भर्तृहरि से कनेक्शन
कैसे आया हर्बल गुलाल बनाने का विचार?
समूह की अध्यक्ष राधा सिंह को यह विचार ग्राम नोडल अधिकारी ऋचा बिरथरे से मिला। उन्होंने सोशल मीडिया पर हर्बल गुलाल बनाने की विधि देखी और इसे समूह की महिलाओं तक पहुँचाया। इससे प्रेरित होकर महिलाओं ने इसे खुद तैयार करने का निर्णय लिया। कम लागत में बनने वाला यह गुलाल न केवल सुरक्षित है, बल्कि गाँव की महिलाओं के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत भी बन सकता है।
राधा सिंह ने बताया कि पारंपरिक रंगों में इस्तेमाल होने वाले रसायन त्वचा के लिए हानिकारक होते हैं और पर्यावरण को भी नुकसान पहुँचाते हैं। इसके विपरीत, हर्बल गुलाल पूरी तरह से प्राकृतिक अवयवों से बना होता है, जिससे एलर्जी या जलन की कोई संभावना नहीं रहती।
स्व सहायता समूहों के लिए नया आय स्रोत
जिला लघु उद्यमिता प्रबंधक महेन्द्र बारस्कर के अनुसार, हर्बल गुलाल लोगों को काफी पसंद आ रहा है और इसकी माँग भविष्य में और बढ़ सकती है। जिला परियोजना प्रबंधक चंद्रभान सिंह ने बताया कि अगले वर्ष से इसे स्थानीय हॉट बाजार और आजीविका मार्ट में बिक्री के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
ये भी पढ़ें- ग्वालियर-चंबल अंचल की सबसे बड़ी होलिका, गायों के 25 हजार कंडों से जलेगी, सात दशक की परंपरा
राधा सिंह ने आसपास के गाँवों के लोगों से अपील की है कि वे इस हर्बल गुलाल का उपयोग करें और दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करें। इस पहल से न केवल स्व सहायता समूह की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल रहा है, बल्कि लोगों को भी सुरक्षित और प्राकृतिक रंगों का बेहतरीन विकल्प मिल रहा है।
भविष्य की योजना
हर्बल गुलाल की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए इसे बड़े स्तर पर उत्पादन करने की योजना बनाई जा रही है। इसके लिए महिलाओं को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे इसे व्यावसायिक रूप से विकसित कर सकें। प्रशासन का भी पूरा सहयोग मिल रहा है और उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में उमरिया के हर्बल गुलाल की पहचान पूरे राज्य में होगी।