उज्जैन नगर ही नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज तेजा दशमी का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस दौरान कोई तेजाजी महाराज को निशान अर्पित कर रहा है तो कोई अन्य तरीकों से भगवान को मनाने में जुटा है। लेकिन, तेजा दशमी पर बड़नगर के एक मंदिर में एक पिता ने ऐसी मिसाल पेश की जिसे याद किया जाएगा।
बड़नगर के श्री सत्यवादी वीर तेजाजी मंदिर मंगलनाथ पथ पर एक पिता ने अपने बेटे के लिए 4 वर्षों पूर्व की गई मन्नत को पूरा करते हुए बेटे को तराजू पर बिठाया और दूसरी ओर उसके वजन के रुपए रखना शुरू किए। बेटे का वजन लगभग 82 किलो था। यही कारण रहा कि तराजू की दूसरी ओर 10-10 के नोटों की गाड़ियों का ढेर लग गया और 10 लाख 7000 रुपए का तुलादान कर यह मन्नत पूरी की गई।
बताया जाता है कि बड़नगर में रहने वाले किसान चतुर्भुज जाट ने 4 वर्षों पहले श्री सत्यवादी वीर तेजाजी मंगलनाथ पथ मंदिर में एक मन्नत की थी। जिसके पूरे होने पर उन्होंने बेटे के वजन के बराबर रुपए मंदिर निर्माण के लिए दान करने की बात कही थी। चतुर्भुज जाट ने यह तो नहीं बताया कि उनकी मन्नत क्या थी और कैसे पूरी हुई, लेकिन उन्होंने मन्नत पूरी होने पर अपना वादा निभाया और 10 लाख 7000 रुपए की राशि तेजाजी मंदिर के निर्माण के लिए दान कर दी। तेजा दशमी पर श्री सत्यवादी वीर तेजाजी मंदिर पर हुए इस तुलादान का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर हर कोई चतुर्भुज जाट की तारीफ करता नजर आ रहा है।
मंदिर में उमड़ी भक्तों की भीड़
बताया जाता है कि तेजाजी मंदिर में आज भाद्रपद शुक्ल पक्ष की दशमी पर भक्तों की भारी भीड़ लगी हुई है। यहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान का पूजन अर्चन करने के साथ ही उन्हें निशान चढ़ाने आ रहे हैं। इस पूजन अर्चन के बीच जब भक्तों ने चतुर्भुज जाट को इस प्रकार की मन्नत पूरी करते देखा, तो उनकी आस्था भगवान तेजाजी के प्रति और भी बढ़ गई।
नोटों का ढेर देखकर हर कोई रह गया आश्चर्यचकित
मंदिर में दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालु एक ओर तुलादान को देखकर आश्चर्यचकित थे और दूसरी ओर उन्हें यह समझ नहीं आ रहा था कि आखिर मंदिर में नोटों की गड्डियों का ढेर क्यों लगा हुआ है। कुछ लोग इन गड्डियों के आसपास खड़े हुए थे और श्रद्धालुओं से दूर से निकलने की बात कर रहे थे। शुरुआत में तो चतुर्भुज जाट और उनके परिवार के लोग इन रुपयों की रक्षा कर रहे थे, लेकिन बाद में श्री सत्यवादी वीर तेजाजी महाराज मंगलनाथ पथ मंदिर निर्माण समिति के लोगों ने इन रुपयों को तुलादान के बाद अपने पास रख लिया। उन्होंने बताया कि चतुर्भुज जाट द्वारा दिए गए रुपयों से अब भगवान के मंदिर का निर्माण जोर-शोर से होगा।