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Ujjain News: वैशाख चतुर्थी आज, भक्तों को दर्शन देने सुबह चार बजे जागे बाबा महाकाल; फिर रमाई भस्म

Tue, 21 Apr 2026 07:28 AM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन

वैशाख शुक्ल पक्ष की चतुर्थी पर मंगलवार सुबह भस्म आरती के दौरान श्री महाकालेश्वर मंदिर में हजारों श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। इस दौरान भक्त देर रात से ही लाइन में लगकर अपने इष्ट देव बाबा महाकाल के दर्शन के लिए पहुंचे। आज बाबा महाकाल भी भक्तों को दर्शन देने के लिए सुबह 4 बजे जागे। उनका अलौकिक श्रृंगार कर भस्म अर्पित की गई। भक्तों ने इन दिव्य दर्शनों का लाभ लिया, जिससे पूरा मंदिर परिसर ‘जय श्री महाकाल’ के जयघोष से गुंजायमान हो गया। दूध, दही, घी, शक्कर, पंचामृत और फलों के रस बाबा का अभिषेक
श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि विश्व प्रसिद्ध मंदिर में वैशाख शुक्ल पक्ष की चतुर्थी पर मंगलवार सुबह 4 बजे भस्म आरती हुई। इस दौरान वीरभद्र जी से आज्ञा लेकर मंदिर के पट खुलते ही पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं की प्रतिमाओं का पूजन-अर्चन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक दूध, दही, घी, शक्कर, पंचामृत और फलों के रस से किया गया।

महाकाल के शिवलिंग पर भस्म अर्पित
पूजन के दौरान प्रथम घंटा बजाकर ‘हरि ओम’ का जल अर्पित किया गया। पुजारियों और पुरोहितों ने इस दौरान बाबा महाकाल का भव्य स्वरूप में श्रृंगार कर कपूर आरती के बाद उन्हें नवीन मुकुट धारण कराया। इसके पश्चात महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल के शिवलिंग पर भस्म अर्पित की गई और फिर झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद के साथ भस्म आरती संपन्न हुई। आज के श्रृंगार की विशेषता यह रही कि बाबा महाकाल का चंदन से श्रृंगार कर भस्म अर्पित की गई। इस दौरान बाबा महाकाल के दिव्य और अलौकिक स्वरूप के दर्शन का लाभ हजारों श्रद्धालुओं ने लिया और ‘जय श्री महाकाल’ का जयघोष किया। मान्यता है कि भस्म अर्पित करने के बाद भगवान निराकार से साकार स्वरूप में दर्शन देते हैं। यह है आरती का समय: भस्म आरती: सुबह 4:00 से 6:00 बजे तक दद्योदक आरती: प्रातः 7:00 से 7:45 बजे तक भोग आरती: प्रातः 10:00 से 10:45 बजे तक संध्या पूजन: सायं 5:00 से 5:45 बजे तक संध्या आरती: सायं 7:00 से 7:45 बजे तक शयन आरती: रात्रि 10:30 से 11:00 बजे तक महाकालेश्वर मंदिर में आरतियों के समय में किया गया यह बदलाव आश्विन मास की पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा) तक जारी रहेगा।

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