बाबा महाकाल की सेवा में पुजारी परिवार द्वारा कई परंपरा निभाई जाती है। ऐसे में बाबा महाकाल को आरती पूजन के साथ नियमित भोग भी लगता है। लेकिन काफी कम लोग जानते हैं कि श्रावण और भादौ के महीने में भगवान एक समय ही भोजन करते हैं। सुबह से लेकर शाम तक फलाहार और शकर के पानी का भोग लगाकर यह परम्परा निभाई जाती है।
महाकाल मंदिर के पुजारी पं. महेश शर्मा ने बताया कि भगवान महाकालेश्वर श्रावण और भादौ महीने में नगर भ्रमण पर निकलते हैं। श्रावण भादौ के प्रत्येक सोमवार और प्रदोष पर भगवान फलाहार ही करते हैं। देर शाम नगर भ्रमण से मंदिर लौटने पर ही संपूर्ण भोग अर्पित किया जाता है। ये दिन-त्याग तपस्या के भी होते हैं, इसलिए बाबा महाकाल अपने भक्तों का दु:ख देख खुद भी उन्हीं की तरह हो जाते हैं।
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इन दिनो रखते हैं उपवास
श्रावण-भाद्रपद मास में छह सवारियां निकलती हैं अब तक 14 जुलाई, 21 जुलाई, 28 जुलाई, 4 अगस्त को सवारी निकल चुकी है अब 11 अगस्त और अंतिम राजसी सवारी 18 अगस्त को निकलेगी। इन दिनों सुबह से शाम तक भगवान उपवास (व्रत) रखते हैं। नगर भ्रमण कर अपने भक्तों को दर्शन देने के बाद मंदिर परिसर आकर व्रत खोलते हैं।
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रक्षाबंधन के प्रसाद से व्रत खोलते हैं भक्त
रक्षाबंधन पर्व पर तड़के भस्म आरती के दौरान सबसे पहले बाबा महाकाल को राखी बांधी जाएगी। इस दौरान पुजारी सवा लाख लड्डुओं का भोग लगाकर भक्तों को प्रसाद स्वरूप बांटेंगे। मंदिर के पुजारी पं. महेश शर्मा का कहना है कि श्रावण मास के दौरान जो लोग पूरे माह व्रत रखते हैं वह इस प्रसाद से ही व्रत खोलते हैं।