'कालों के काल बाबा महाकाल के दरबार में आकर मुझे बहुत अच्छा लगा हैं। मंदिर में वीआईपी श्रद्धालुओं के लिए दर्शन व्यवस्था काफी अच्छी है। यही कारण है कि मुझे बार-बार यहां आने का मन करता है। बाबा महाकाल का आशीर्वाद सभी पर बना रहे, यही मेरी कामना है। मैं तो बाबा महाकाल के दर्शन कर धन्य हो गया। यह बात भारतीय क्रिकेटर आकाश मधवाल ने बाबा महाकाल के दर्शन के बाद मीडिया से कही। दर्शन के दौरान आकाश के साथ अन्य लोग भी मौजूद थे, जिन्होंने भगवान महाकाल के दर्शन का लाभ लिया।
इंजीनियरिंग से क्रिकेट तक का सफर
उत्तराखंड के रुड़की जिले के रहने वाले 31 साल के आकाश मधवाल के लिए क्रिकेट का सफर आसान नहीं था। 25 नवंबर 1993 को जन्मे आकाश के पिता भारतीय सेना में थे। इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद आकाश को क्रिकेटर बनने का जुनून सवार हुआ। इससे पहले वह केवल टेनिस बॉल क्रिकेट खेलते थे। आकाश ने 24 साल की उम्र तक कभी लेदर बॉल को हाथ तक नहीं लगाया था। उन्होंने कभी फॉर्मल कोचिंग भी नहीं ली थी। एक दिन अचानक उत्तराखंड टीम के ट्रायल्स में पहुंचे, जहां कोच मनीष झा उनकी प्रतिभा से प्रभावित हुए। उन्होंने आकाश को टीम में शामिल कर अपनी देखरेख में प्रशिक्षित किया। टेनिस बॉल से खेलने के कारण आकाश के पास तेज गेंदबाजी का स्वाभाविक कौशल था, जिसका फायदा उन्हें क्रिकेट के मैदान में मिलता है।