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Mahakal: महाकाल की शाही सवारी मार्ग को लेकर घमासान, महापौर की मांग मार्ग बदलें, पुजारी बोले-आएंगे दुष्परिणाम

Mon, 04 Aug 2025 06:06 PM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन

नगर में आज भले ही बाबा महाकाल की चौथी और श्रावण मास की अंतिम सवारी धूमधाम से निकाली जा रही हो, लेकिन महापौर मुकेश टटवाल द्वारा मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से 18 अगस्त को निकाली जाने वाली बाबा महाकाल की राजसी सवारी का मार्ग बदलने और इसे बढ़ाए जाने का मामला अब तूल पकड़ता नजर आ रहा है। महापौर ने एक पत्र के माध्यम से सवारी मार्ग को कोविड के समय निकाले गए मार्ग से निकालने की मांग तो की है, लेकिन महाकाल मंदिर के पुजारी ने इस पर कड़ा विरोध जताते हुए सवारी मार्ग में कोई भी छेड़छाड़ न करने की बात कही है। साथ ही यह चेतावनी भी दी है कि अगर सवारी की व्यवस्थाओं को बदला गया तो हमें इसके दुष्परिणामों के लिए भी तैयार रहना पड़ेगा।



बता दें कि महापौर मुकेश टटवाल ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को एक पत्र सोपा है, जिसमें उन्होंने लिखा है कि बाबा महाकाल की राजसी सवारी 6 से 9 मीटर के छोटे मार्ग से होते हुए रामघाट तक पहुंचती है। बाबा महाकाल की राजसी सवारी में क्योंकि देश-विदेश के लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं इसीलिए इस सवारी को कोविड के समय निकल जाने जाने वाले मार्ग यानी कि बड़ा गणेश मंदिर, विक्रम टीला, शेर चौराहा, हरसिद्धि माता मंदिर, हरसिद्धि पाल से होते हुए रामघाट ले जाना चाहिए, क्योंकि यह मार्ग काफी चौड़ा और सुरक्षा की दृष्टि से काफी ठीक है। जबकि गुदरी चौराहा से रामघाट तक आने वाले इस मार्ग पर श्रद्धालुओं को राजसी सवारी के दर्शन करने के दौरान कहीं कोई कष्ट नहीं झेलने पड़ेंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ यादव से राजसी सवारी के दौरान इस मार्ग को बदलने के साथ ही रामघाट पर होने वाले सवारी के पूजन के बाद सवारी मार्ग को और भी बढ़ाए जाने की मांग की है, जिससे कि ज्यादा से ज्यादा भक्त बाबा महाकाल की सवारी के दर्शन लाभ ले सकें।

महापौर मुकेश टटवाल ने तो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से यह मांग कर डाली है लेकिन इस मांग की जानकारी लगते ही महाकाल मंदिर के पुजारी सवारी मार्ग को बदलने का विरोध करने लगे हैं। महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि देश के मंदिरों की अपनी अपनी परंपरा है इन परंपराओं से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ होना गलत है। देवताओं के साथ अगर परंपराओं को छेड़छाड़ किया जाता है तो फिर हमें इसका दुष्परिणाम भुगतने के लिए भी तैयार रहना चाहिए। उन्होंने बताया कि महाकाल राजा हैं उन्हें मजाक बनाना गलत है। बार-बार सवारी मार्ग बदलने की मांग की जाती है जो कि गलत है। जिसे भी बाबा महाकाल के दर्शन करना होते हैं वह कैसे भी उनके दर्शनों का लाभ ले लेते हैं। बहाने बनाने वालों के लिए तो हम यह कह सकते हैं कि कल से वह कहेंगे कि बाबा महाकाल के दर्शन गर्भग्रह में ठीक से नहीं होते हैं तो क्या हम उनके लिए बाबा महाकाल को शिखर पर विराजमान कर देंगे। कुल मिलाकर हिंदू सनातन धर्म को कुछ लोग समाप्त करना चाहते हैं। इसके साथ छेड़छाड़ करना और हिंदू व्यवस्थाओं पर प्रहार करना ही उन लोगों का काम है। शिव भक्त भगवान शिव की व्यवस्थाओं को अच्छे से जानते हैं, समझते हैं। सवारी के साथ व्यवस्थाओं को ना बदल जाए। ऐसी ही हमारी विनती है और हमारी मांग है। सीधी सी बात है कि हमें ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए, जिससे परंपराओं और पवित्रताओं को ध्वस्त किया जाए अगर हम कुछ भी गलत करेंगे तो फिर प्रलय आएगा। मुकेश टटवाल का वो पत्र, जो सीएम को लिखा गया।
  पुजारी महेश शर्मा  

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