फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ujjain Mahakal: बसंत पंचमी पर सरसों के फूलों से सजे बाबा महाकाल, शाम को गुलाल अर्पित कर होगी होली की शुरुआत

Fri, 23 Jan 2026 07:21 AM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन

भगवान महाकाल के दरबार में आज शुक्रवार की सुबह विशेष रही। यहां बसंत पंचमी के अवसर पर भगवान महाकाल को दूध, दही, शहद, शक्कर, जल के साथ-साथ सरसों के फूलों से भी शृंंगार किया गया। इसके बाद भगवान महाकाल का सूखे मेवे से शृंंगार कर सरसों के फूल और पत्तियों से सजाया गया। फिर भव्य भस्म आरती हुई। भगवान महाकाल के दरबार में बसंत पंचमी के अवसर पर विशेष पूजा अर्चना की गई। महाकाल मंदिर के पुजारी पंडित आशीष शर्मा ने बताया कि बसंत पंचमी के पर्व की शुरुआत राजाधिराज के आंगन से हुई। सबसे पहले भगवान को सरसों के फूल चढ़ाकर यह पर्व मनाया गया।

आज के दिन दर्शन का विशेष महत्व
वर्ष भर में एक बार ही महाकाल मंदिर समिति द्वारा सरसों के फूल चढ़ाए जाने की व्यवस्था की गई। ऐसा दृश्य वर्ष भर में एक बार ही दिखाई दिया। पंडित आशीष पुजारी बताते हैं कि आज के दिन दर्शन का भी विशेष महत्व है। बसंत पंचमी पर प्रकृति हरी भरी रहती है और भगवान महाकाल भी आनंदित होकर भक्तों पर कृपा बरसाते हैं। इस अद्भुत पल का भक्तों को साल भर इंतजार रहता है।

संध्या आरती में उड़ेगा गुलाल
पंडित अर्पित गुरु के मुताबिक भगवान महाकाल को सुबह सरसों के फूल चढ़ाए जाते हैं और शाम को संध्या आरती में गुलाल चढ़ाया जाता है। आज से महाकाल मंदिर में होली पर्व की भी शुरुआत हो गई है। भगवान महाकाल के आंगन में गुलाल अर्पित करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी आते हैं।

वर्ष भर में एक बार भगवान को सरसों के फूलों से सजाया
महाकालेश्वर मंदिर में बसंत पंचमी के अवसर पर राजाधिराज भगवान महाकाल के दर्शन से शक्ति और बुद्धि का एक साथ वरदान मिलता है। वर्ष भर में एक बार भगवान को सरसों के फूलों से सजाया जाता है। महाकाल मंदिर में आज के दिन भगवान महाकाल के साथ ही मां सरस्वती की भी संयुक्त रूप से आराधना होती है।

ये भी पढ़ें- Dhar Bhojshala: 'सूर्योदय से सूर्यास्त तक प्रार्थना कर सकेंगे'; धार भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट का निर्देश

केसरिया पीले पकवानों का लगा भोग
बसंत पंचमी का पर्व आज देशभर में मनाया जा रहा है। उज्जैन में हर त्योहार की तरह बसंत पंचमी भी सबसे पहले श्री महाकालेश्वर मंदिर में मनाई है। ऋतु परिवर्तन के इस महापर्व पर भगवान महाकाल का विशेष वासंती शृंंगार हुआ और मंदिर का कोना-कोना पीले रंगों से सजा नजर आया। उत्सव की शुरुआत शुक्रवार तड़के 4 बजे भस्मार्ती से हुई। इस दौरान पुजारियों ने भगवान महाकाल का केसरिया पंचामृत से अभिषेक किया। अभिषेक के पश्चात बाबा को वसंत के विशेष पीले पुष्प अर्पित किए गए। केसरिया पीले पकवानों का भोग लगाया गया और आरती हुई। आज पूरे दिन होने वाली पांचों आरतियों में परंपरा के अनुसार परिवर्तन दिखेगा। भगवान को विशेष वासंती पोशाक धारण कराई जाएगी। सहायक प्रशासक आशीष फलवाडिय़ा ने बताया कि संध्या आरती में भगवान को हर्बल गुलाल, वसंत के पीले फूल और केसरिया पेड़े का नैवेद्य अर्पित किया जाएगा।

विज्ञापन

Latest

Recommended

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
AU ऐप में पढ़ें