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Ujjain News: भांग-श्रृंगार, चंद्रमा-बेलपत्र से सजे महाकाल, भोर 4 बजे जागे, भस्म आरती में उमड़ा भक्तों क सैलाब

Tue, 05 May 2026 07:38 AM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन

उज्जैन स्थित बाबा महाकाल के दरबार में ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी पर मंगलवार सुबह भस्म आरती के दौरान श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। तड़के 4 बजे से शुरू हुई इस दिव्य आरती में हजारों भक्तों ने हिस्सा लिया और पूरे मंदिर परिसर में “जय श्री महाकाल” के जयकारों से वातावरण गूंज उठा। भोर से पहले ही लग गई लंबी कतारें
भक्त देर रात से ही मंदिर पहुंचने लगे थे और दर्शन के लिए लंबी कतारों में खड़े हो गए। सुबह 4 बजे बाबा महाकाल को जागृत किया गया और उनके अलौकिक श्रृंगार के बाद भस्म आरती संपन्न हुई। भक्तों ने इस दिव्य स्वरूप के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस किया। भव्य पूजन और भस्म आरती का क्रम
श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा के अनुसार, मंदिर के पट खुलते ही वीरभद्र जी से आज्ञा लेकर गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं का पूजन-अर्चन किया गया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक दूध, दही, घी, शक्कर, पंचामृत और फलों के रस से किया गया।
पूजन के दौरान प्रथम घंटा बजाकर “हरि ओम” का जल अर्पित किया गया। पुजारियों ने भगवान का भव्य श्रृंगार किया और कपूर आरती के बाद उन्हें नवीन मुकुट धारण कराया। भस्म अर्पण की विशेष परंपरा
इसके बाद महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से शिवलिंग पर भस्म अर्पित की गई। झांझ, मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद के साथ भस्म आरती संपन्न हुई। आज के श्रृंगार की खास बात यह रही कि भगवान महाकाल के मस्तक पर चंद्रमा और बेलपत्र चढ़ाकर भस्म अर्पित की गई। मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं। श्रद्धालुओं ने किए दिव्य दर्शन
इस दिव्य और अलौकिक स्वरूप के दर्शन का लाभ हजारों श्रद्धालुओं ने लिया। पूरे मंदिर परिसर में “जय श्री महाकाल” के जयघोष से भक्तिमय माहौल बना रहा। आरती का समय (बदला हुआ शेड्यूल) भस्म आरती: सुबह 4 से 6 बजे तक दद्योदक आरती: प्रातः 7 से 7:45 बजे तक भोग आरती: प्रातः 10 से 10:45 बजे तक संध्या पूजन: सायं 5 से 5:45 बजे तक संध्या आरती: सायं 7:00 से 7:45 बजे तक शयन आरती: रात्रि 10:30 से 11:00 बजे तक फिलहाल व्यवस्था
महाकालेश्वर मंदिर में आरतियों के समय में किया गया यह बदलाव आश्विन मास की पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा) तक लागू रहेगा। मंदिर प्रशासन श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यवस्थाएं बनाए हुए है।  

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