टीकमगढ़ शहर के सिविल लाइन में स्थित शहनाई गार्डन में ओशो ध्यान साधना शिविर का आयोजन किया जा रहा है। इस शिविर को संचालित करने के लिए स्वामी अविनाश आए हुए हैं, जो शिविर का संचालन कर रहे हैं। स्वामी अविनाश ने बताया कि इस शहर में ध्यान शानदार तरीके से संपन्न कराए जा रहे हैं। स्वामी अविनाश ने बताया कि ओशो के संन्यास के बारे में इस शिविर में विशेष विस्तृत चर्चा की जा रही है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि ओशो का संन्यास सबसे सरल सन्यास है, इसकी केवल एक ही शर्त है कि आपको केवल प्रतिदिन एक घंटे ध्यान करना है। ध्यान की अनिवार्यता बताते हुए उन्होंने कहा कि ध्यान हमें स्वयं से जोड़ता है और हमारे जीवन से सारी नकारात्मक परिस्थितियों को दूर करता है, इस शिविर का रविवार को होगा समापन।
स्वामी अविनाश ने बताया कि शिविर का शुभारंभ शुक्रवार सुबह किया गया था। शनिवार की दोपहर मीडिया से बात करते हैं। उन्होंने बताया कि यह शिविर रविवार तक चलेगा और रविवार को दोपहर में भोजन के बाद इसका समापन होगा। शिविर में जहां अन्य राज्यों के ओशो भक्त पहुंचे तो वहीं स्थानीय भक्तों ने भी इस शिविर में भाग लिया।
उन्होंने बताया कि शिविर में 12 राज्यों से 70 ओशो भक्त पहुंचे हैं, जो ओशो ध्यान में भाग ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि ओशो भक्तों का मूल उद्देश्य ओशो के ज्ञान को आगे बढ़ाना है, जिससे कि लोगों में नकारात्मक ऊर्जा खत्म हो और उनका जीवन उमंग उत्साह से भरा रहे। इसलिए संस्थान द्वारा जगह-जगह शिविरों का आयोजन किया जाता है। इसी कड़ी में टीकमगढ़ शहर में भी तीन दिवसीय ओशो शिविर का आयोजन किया गया है।
टीकमगढ़ शहर के रहने वाले ओशो भक्त रजनीश ने बताया कि निश्चित ही ओशो ने हमें जीवन जीने की कला दी है और ओशो के शिविर में ध्यान करने से मन को शांति और ऊर्जा मिलती है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया में ओशो भले नहीं हैं। लेकिन उनके द्वारा बताए गए मार्ग पर चलने से मन को शांति और एक ऐसी ऊर्जा की प्राप्ति होती है, जो हमें जीवन जीने की कला सिखाती है। उन्होंने कहा कि यही वजह है कि आज ओशो के न रहने के बाद भी उनके भक्त उनके बताएं मार्ग पर चलने का प्रयास कर रहे हैं।