मध्यप्रदेश में कथित रूप से जहरीली कफ सिरप के सेवन से हुई बच्चों की मौतों ने अब राजनीतिक रूप ले लिया है। कांग्रेस ने राज्य सरकार पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए 9 अक्टूबर को प्रदेशभर में कैंडल मार्च और विरोध प्रदर्शन आयोजित करने की घोषणा की है। पार्टी ने बताया कि यह प्रदर्शन सभी जिलों और ब्लॉकों में एक साथ किए जाएंगे।
कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मंगलवार को प्रेस वार्ता में इस घटना को “सरकार की आपराधिक लापरवाही” बताते हुए मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और प्रशासनिक अमले को सीधे कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने बताया कि बीते कुछ हफ्तों में छिंदवाड़ा और बैतूल जिलों में अब तक 17 बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य बच्चे गंभीर हालत में नागपुर के अस्पतालों में भर्ती हैं।
पटवारी ने सवाल उठाया कि मुख्यमंत्री ने अब जाकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की, लेकिन जो बच्चे अभी वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं, उनकी सुध कौन ले रहा है? उन्होंने प्रेस वार्ता के दौरान एक वीडियो भी दिखाया और सरकार पर तीखा हमला बोला। छिंदवाड़ा कलेक्टर के तबादले को लेकर उन्होंने कहा कि यदि कलेक्टर को समय रहते नहीं हटाया जाता, तो संभवतः हालात नियंत्रित हो सकते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने जनता का ध्यान भटकाने के लिए कलेक्टर को हटाया है। साथ ही उन्होंने पूछा कि “स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र शुक्ल का इस्तीफा अब तक क्यों नहीं लिया गया? क्या सरकार उन्हें बचा रही है?”
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राज्य में नकली और जहरीली दवाइयां खुलेआम बिक रही हैं, और सरकार चुप है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले भी इसी कंपनी की दवाओं से बच्चों की मौतें हो चुकी थीं, फिर भी उसे दोबारा लाइसेंस देकर दवाएं बेचने की अनुमति दे दी गई। यह दर्शाता है कि राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह विफल हो चुके हैं।
पटवारी ने कहा कि पोस्टमार्टम एक भी बच्चे का नहीं हुआ, और परिजनों से पूछताछ तक नहीं की गई। उन्होंने सरकार को “मगरमच्छ जैसी चमड़ी वाली” बताते हुए कहा कि इसमें एक भी मंत्री ईमानदार नहीं है। उन्होंने घोषणा की कि कांग्रेस इस त्रासदी को राजनीति का मुद्दा नहीं बनाएगी, बल्कि इसे जनजागरण अभियान के रूप में उठाएगी।