सावन के अंतिम सोमवार ज्योतिर्लिंग भगवान ओंकारेश्वर और भगवान ममलेश्वर की महासवारी निकाली गई। चांदी की पालकी में सवार होकर भगवान सर्वप्रथम मां नर्मदा के तट पर पहुंचे। जहां विद्वान ब्राह्मणों द्वारा पूजन और अभिषेक करवाया गया। इसके बाद दक्षिण तट से भगवान मलेश्वर महाराज की सवारी के साथ नगर भ्रमण किया गया और इसके बाद भगवान ने नौका विहार किया। इस दौरान पूरे मार्ग में ढोल धमाकों की गूंज रही। भक्त गुलाल और गुलाब की पंखुड़ियां उड़ा कर भगवान का स्वागत करते रहे, और उनकी एक झलक पाने को भक्त आतुर दिखे।
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तीर्थ पंडा संघ के अध्यक्ष पंडित नीलेश पुरोहित ने बताया कि भगवान श्री ओंकारेश्वर महाराज की महासवारी सावन के अंतिम सोमवार को दोपहर दो बजे ज्योतिर्लिंग मंदिर परिसर से निकली। इसके पूर्व भगवान का संक्षिप्त पूजन मंदिर परिसर में ही किया गया। आज महासवारी थी, इसलिए रजत प्रतिमा और रजत सवारी निकाली गई। इसमें विराजमान होकर भगवान ओंकारेश्वर महाराज सबसे पहले नर्मदा मैया के तट पर पहुंचे, जहां विद्वान ब्राह्मणों द्वारा भगवान का पूजन अभिषेक कराया गया। इसके बाद भगवान को मां नर्मदा में नौका विहार कराया गया। महासवारी का रूट भी बड़ा रखा गया। महासवारी तीर्थ नगरी के मुख्य मार्गों से होती हुई आधी रात के करीब वापस मंदिर पहुंची।