प्रदेश में इन दिनों कड़ाके की ठंड का दौर जारी है। खंडवा सहित निमाड़ क्षेत्र में भी शीतलहर का असर स्पष्ट दिखाई दे रहा है। जहां आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है, वहीं इस ठंड का असर अब फसलों पर भी दिखाई देने लगा है। कई स्थानों पर फसलों में रोग और कीट हमले की शुरुआत हो गई है, जिससे उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है।
मौसम वैज्ञानिक सौरभ गुप्ता के अनुसार वर्तमान में राजस्थान और उत्तर प्रदेश सहित उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में कड़ाके की ठंड बनी हुई है। मध्य प्रदेश में भी ग्वालियर तक के क्षेत्र में शीतलहर मजबूत बनी हुई है। हालांकि दक्षिण भारत में कम दबाव का क्षेत्र बनने से एंटी-साइक्लोनिक सर्कुलेशन सक्रिय है, जिसके कारण निमाड़, खंडवा, रतलाम, अलीराजपुर और झाबुआ में ठंड थोड़ी कम महसूस हो रही है और दिन में धूप की तल्खी बढ़ गई है। लेकिन मौसम विभाग का अनुमान है कि 9 से 15 जनवरी के बीच एक बार फिर पूरे मध्य प्रदेश में शीतलहर का जोर बढ़ेगा और तापमान में भारी गिरावट दर्ज की जा सकती है।
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फसलों की स्थिति पर सौरभ गुप्ता ने बताया कि इस समय चना, सरसों और गेहूं की फसलें फली और फूल आने की अवस्था में हैं। ऐसे में इन फसलों पर रस चूषक कीट, इल्ली और अन्य बीमारियों का प्रकोप देखने को मिल सकता है। उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि वे अपनी फसलों की सतत निगरानी रखें और किसी भी समस्या की स्थिति में कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क कर विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार ही दवाइयों का छिड़काव करें।
मौसम वैज्ञानिक ने यह भी कहा कि किसान अनावश्यक दवाओं का छिड़काव न करें, क्योंकि इससे लागत बढ़ती है और फसल को नुकसान भी पहुंच सकता है। उचित समय पर और सही मात्रा में ही दवाओं का उपयोग करने से फसल की सुरक्षा और उत्पादन दोनों बेहतर रहेंगे।