शासकीय नेताजी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में दवा व सर्जिकल सामग्री खरीदी में सवा करोड़ रुपये की धांधली का मामला प्रकाश में आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने जांच के बाद मेडिकल कॉलेज की तत्कालीन महिला अधीक्षक, फार्मासिस्ट तथा कंपनी के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया है। आरोपियों द्वारा वित्त अधिकारी की अनुशंसा के विपरीत नए टेंडर जारी नहीं करते हुए संबंधित कंपनी से अधिक दर में सामग्री का क्रय करते हुए सवा करोड़ का अतिरिक्त भुगतान किया गया था।
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ईओडब्ल्यू से प्राप्त जानकारी के अनुसार वित्तीय वर्ष 2011-2012 के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल में दवा व सर्जिकल सामग्री खरीदने के लिए निविदा आमंत्रित की गई थी। प्रथम पांच निविदाकारों ने सामग्री प्रदान करने में असहमत्ति व्यक्त की थी। वित्त अधिकारी ने एल 1 से एल 5 तक के निविदाकर्ताओं की सुरक्षा निधि राजसात करते हुए एल 6 निविदाकर्ता मेसर्स मेडिनोवा फार्मास्यूटिकल एंड सर्जिकल डिस्ट्रीब्यूटर से दवा एवं सर्जिकल सामग्री खरीदने तथा नए टेंडर जारी करने अभिमत दिया था।
वित्त अधिकारी के अभिमत के अनुसार प्रथम पांच निविदाकर्ता की सुरक्षा निधि राजसात करते हुए एल 6 से 18 अक्टूबर 2011 में अनुबंध निष्पादित किया गया था।
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तत्कालीन संयुक्त संचालक स्वास्थ्य तथा मेडिकल कॉलेज की अधीक्षक सविता वर्मा ने ठेकेदार कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए अनुबंध में उसकी समाप्ति की तिथि का उल्लेख नहीं किया था। फार्मास्टिक आरपी दुबे ने 11 जनवरी 2012 को क्रय शाखा का पदभार संभाला था। उनके द्वारा वित्त अधिकारी के अभिमत को नहीं मानते हुए साल 2013 तक मेसर्स मेडिनोवा फार्मास्यूटिकल एंड सर्जिकल डिस्ट्रीब्यूटर से दवा एवं सर्जिकल सामग्री की खरीदी महंगे दामों में की गई। इस दौरान कंपनी को 7 करोड 63 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था। दवा क्रय नीति वर्ष 2009 के प्रावधानों की अनदेखी करते हुए ठेकेदार कंपनी को इस दौरान सवा करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया गया। ईओडब्ल्यू ने तीनों आरोपियों के खिलाफ धारा 409, 120 बी तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया है। ईओडब्लयू के डीएसपी स्वर्ण सिंह धामी के नेतृत्व में उक्त कार्रवाई की गई।