अगर आप भी डिलीवरी के बाद एलपीजी सिलेंडर को सिर्फ रेग्यूलेटर लगाने वाले स्थान पर चैक करके संतुष्ट हो जाते हैं तो सावधान हो जाईए। सिलेंडर के लीकेज की संभावना सिर्फ ऊपरी हिस्से तक ही सीमित नहीं है बल्कि उसके निचले हिस्से (तल) से भी गैस लीक हो सकती है।
दरअसल, गुना जिले के बॉटलिंग प्लांट में लापरवाही का ऐसा ही एक मामला सामने आया है। बॉटलिंग प्लांट से रोजाना की तरह वाहन में सिलेंडर भरकर गैस एजेंसियों को भेजे गए । सिलेंडरों से भरा एक वाहन गुना की एक एजेंसी पहुंचा। बॉटलिंग प्लांट के कर्मचारी सिलेंडर डिलेवर कर लौट आए। एजेंसी पर मौजूद स्टाफ को कुछ संदेह हुआ। छानबीन करने पर पता चला कि एक सिलेंडर की तलहटी लीक हो रही है। छेद इतना बड़ा था कि उसमें से निकलने वाली एलपीजी की आवाज स्पष्ट सुनाई दे रही थी। गैस एजेंसी संचालक ने तुरंत बॉटलिंग प्लांट के अधिकारियों से संपर्क किया तो उनके भी हाथ-पैर फूल गए। आनन-फानन में एजेंसी को सलाह दी गई कि लीकेज सिलेंडर को थोड़ी दूर रख दें, ताकि कुछ देर में अपने आप गैस निकल जाएगी। एजेंसी संचालक ने निर्देशों का पालन किया और कुछ घंटों में सिलेंडर खाली भी हो गया। हालांकि सवाल यह उठता है कि अगर लीकेज सिलेंडर किसी ग्राहक के घर पहुंचा दिया जाता तो क्या होता?
रोजाना रिफिल होते हैं 25 हजार सिलेंडर
जानकारी के मुताबिक गुना के बॉटलिंग प्लांट में रोजाना लगभग 25 हजार सिलेंडरों को रिफिल किया जाता है। प्रतिदिन 80 से 100 वाहनों में सिलेंडर भरकर जिलेभर की एजेंसी को रवाना किए जाते हैं। एक वाहन में 342 सिलेंडर आते हैं। इतनी बड़ी तादाद में सिलेंडर रिफिल होने के बावजूद प्लांट में सुरक्षा और गुणवत्ता जांचने की प्रक्रिया में लापरवाही बरती जा रही है।
कहीं गुना में भी न हो जाए वड़ोदरा जैसा हादसा
बॉटलिंग प्लांट में हल्की सी लापरवाही कितनी घातक साबित हो सकती है। इसके उदाहरण बीते दिनों गुजरात के वड़ोदरा और उत्तरप्रदेश के मथुरा में सामने आ चुके हैं। वड़ोदरा के कोयली गांव स्थित आईओसीएल के बॉटलिंग प्लांट में 11 नवम्बर 2024 को स्टोरेज टैंक में भीषण आग लग गई थी। इस दौरान जोरदार धमाका हुआ और प्लांट से लगभग 4 किलोमीटर दूर तक रहने वाले लोगों ने झटके महसूस किए थे। टैंक से निकला धुआं 10 किलोमीटर दूर तक देखा गया। हादसे की वजह रख-रखाव में लापरवाही बरतना सामने आई थी।