दमोह के मिशन अस्पताल में सात मरीजों की मौत के आरोपी फर्जी कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर एनजॉन केम की जेल रिमांड पूरी होने के बाद पुलिस ने गुरुवार शाम आरोपी को न्यायालय में पेश किया। इस दौरान छत्तीसगढ़ के सरकंडा थाने की पुलिस आरोपी डॉक्टर की रिमांड लेने के लिए न्यायालय पहुंची। छत्तीसगढ़ पुलिस के आवेदन पर सीजीएम स्नेहा सिंह ने डॉक्टर को छत्तीसगढ़ पुलिस के हवाले कर दिया। वहीं दूसरी सुनवाई में डॉक्टर ने अपने अधिवक्ता सचिन नायक की फीस और अन्य ज़रूरी सामग्री से जुड़े खर्च के लिए लीगल एडवाइजर अधिवक्ता मनीष नगाइच को एक लाख रुपये का चेक दिया है। चेक देने पर न्यायाधीश ने डॉक्टर से पूछा कि आप क्या अधिवक्ता मनीष को जानते हैं जो आप उन्हें चेक दे रहे हैं। इस पर डॉक्टर का कहना था कि उन्हें कई चीजों की जरूरत है, कई भुगतान करने हैं, जिसके लिए पैसे की आवश्यकता है और उन्हें अधिवक्ता पर पूरा भरोसा है।
ये भी पढ़ें- सात लोगों की मौत का आरोपी डॉक्टर 11 दिन से नहाया न कपड़े बदले, टिफिन और एसी की रखी डिमांड
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष की मौत का मामला
इस मामले में सीएसपी अभिषेक तिवारी ने बताया कि छत्तीसगढ़ पुलिस आरोपी डॉक्टर को लेने दमोह न्यायालय पहुंची थी। न्यायालय ने स्वीकृति दे दी है। शासन की ओर से मामले की पैरवी कर रहे एडीपीओ सतीश कपस्या ने बताया कि न्यायालय में दो कार्रवाई हुई है। एक कार्रवाई में आरोपी डॉक्टर के अधिवक्ता ने फीस भुगतान के लिए मांग की थी जिस पर डॉक्टर ने चेक दिया है। दूसरा मामला बिलासपुर छत्तीसगढ़ के सरकंडा थाने से जुड़ा है जहां पूर्व विधानसभा अध्यक्ष राजेंद्र शुक्ला की इलाज के दौरान मौत हुई थी। उस मामले में भी पुलिस ने डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। आरोपी डॉक्टर की मांग पर मामले की पैरवी लीगल डिफेंस एडवाइजर अधिवक्ता मनीष नगाइच ने की।
ये भी पढ़ें- सात मौतों के आरोपी डॉ नरेंद्र की MRCP की डिग्री निकली फर्जी, यूके के हॉस्पिटल ने मेल कर की पुष्टी
डॉक्टर ने कोर्ट को बताया कि उसके सभी ट्रांजैक्शन बंद हैं। अधिवक्ता की फीस नहीं दे सकता, इसलिए उसे अधिवक्ता उपलब्ध कराया जाए। अधिवक्ता मनीष ने बताया कि डॉक्टर ने पूर्व अधिवक्ता की फीस और अन्य खर्चों के लिए चेक दिया है। वहीं छत्तीसगढ़ पुलिस को डॉक्टर से पूछताछ करनी है। न्यायाधीश ने डॉक्टर का मेडिकल परीक्षण कराने के बाद उन्हें छत्तीसगढ़ पुलिस को चार दिन के लिए सौंपा है। अब छत्तीसगढ़ न्यायालय तय करेगा कि आरोपी डॉक्टर को रिमांड बढ़ानी है या फिर वापस दमोह जेल भेजना है। इस दौरान आरोपी डॉक्टर ने कहा कि वह न्यायिक प्रक्रिया में पूरा साथ देंगे। वहीं छत्तीसगढ़ पुलिस से जुड़े अधिकारियों ने इस मामले में कुछ भी नहीं बोला।