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Holi 2026: 70 वर्षों से परंपरा अडिग, झांझर में केवल गोबर के उपलों से जलती है होलिका

Mon, 02 Mar 2026 06:49 PM IST
बुरहानपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बुरहानपुर

बुरहानपुर जिला के ग्राम झांझर में आस्था, परंपरा और पर्यावरण संरक्षण का अनोखा संगम देखने को मिलता है। यहां पिछले 70 वर्षों से होलिका दहन केवल गोबर के उपलों और कंडों से ही किया जाता है। गांव की स्थापना के समय ग्राम प्रधान स्व. जीवा नारायण ने यह संकल्प लिया था कि होलिका दहन में लकड़ी का उपयोग नहीं किया जाएगा, बल्कि गोबर से बने उपलों से ही अग्नि प्रज्ज्वलित की जाएगी।

आज भी उनकी चौथी पीढ़ी इस परंपरा को पूरी निष्ठा और श्रद्धा के साथ निभा रही है। वर्तमान ग्राम पटेल वाला जीवा और ग्रामीणजन, विशेषकर बारोट एवं चारण समाज के लोग, इस संकल्प को अपना धर्म मानकर आगे बढ़ा रहे हैं। गांव में होलिका दहन का दृश्य न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक होता है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण का भी सशक्त संदेश देता है।

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जहां एक ओर देशभर में होलिका दहन के लिए पेड़ों की कटाई की खबरें सामने आती हैं, वहीं झांझर गांव ने वर्षों पहले ही प्रकृति संरक्षण की मिसाल कायम कर दी थी। गोबर के उपलों से होने वाला यह दहन न केवल पारंपरिक है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी कम हानिकारक माना जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि यह परंपरा सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पूर्वजों की अमानत है। हर वर्ष पूरे विधि-विधान से होलिका सजाई जाती है और फिर गोबर के उपलों से ही अग्नि प्रज्ज्वलित की जाती है।
झांझर गांव की यह अनूठी पहल आज के समय में एक प्रेरणादायक उदाहरण बन चुकी है। यह संदेश देती है कि यदि संकल्प मजबूत हो तो परंपरा और प्रकृति संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं।    झांझर में आज भी बिना लकड़ी के होता है होलिका दहन   

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