समाज में बढ़ती वृद्धों की उपेक्षा और परिवारों की ओर से अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ने की एक घटना सामने आई है। इसमें काफी समय से वृद्ध आश्रम में रहे एक बुजुर्ग की जब मौत हो गई तो परिजनों ने वृद्ध आश्रम में आकर बुजुर्ग का अंतिम संस्कार करने की बजाय वृद्ध को लेने आने से ही इनकार कर दिया। बाद में वृद्ध आश्रम के लोगों ने विधिपूर्वक बुजुर्ग का अंतिम संस्कार किया और मानवीयता का परिचय भी दिया।
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श्मशान समिति के अध्यक्ष और समाजसेवी सुधीर जैन भाई ने बताया कि आगे मालवा में अपना घर वृद्धाश्रम में रह रहे सुसनेर तहसील के सेमली गांव निवासी हरिसिंह का गत दिनों निधन हो गया था। जिसे कुछ समय पहले उनकी बहन और बेटी ने गांव के भेरूसिंह और दो अन्य लोगों के साथ वृद्धाश्रम में छोड़ा था। हरि सिंह की मौत पर आश्रम प्रबंधन ने जब भेरूसिंह को बुजुर्ग के निधन की सूचना दी तो भेरूसिंह ने मृतक के परिजनों से चर्चा की, लेकिन परिवार के लोगों ने इस घटना पर शोक मनाने की बजाय अंतिम संस्कार में आने से ही मना कर दिया।
आश्रम परिवार ने किया अंतिम संस्कार
जब परिवार के लोगों ने बुजुर्ग को ले जाने से इनकार किया तो श्मशान समिति के अध्यक्ष और समाजसेवी सुधीर जैन और वृद्धाश्रम की संचालिका मीना जयंत ने विधिवत अंतिम संस्कार कर दिया।