पूना पैक्ट भारतीय लोकतंत्र की दिशा तय करने वाला ऐतिहासिक समझौता है। बाबा साहेब आंबेडकर ने वंचितों को राजनीतिक हिस्सेदारी दिलाने के लिए जिस संघर्ष और दूरदर्शिता का परिचय दिया, वही आज हमें समान अधिकारों और अवसरों की गारंटी देता है। यह बात विधान परिषद सदस्य डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने पूना पैक्ट दिवस के मौके पर विधानसभा मार्ग स्थित अंबेडकर महासभा भवन में बुधवार आयोजित संगोष्ठी में बतौर मुख्य वक्ता कही। उन्होंने कहा कि युवाओं से आंबेडकर की शिक्षा और विचारों को जीवन में अपनाने का भी आह्वान किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए लखनऊ के लोकपाल आरआर जैशवार ने कहा कि सामाजिक न्याय और समानता की अवधारणा पूना पैक्ट की नींव से ही मजबूत हुई। आज की पीढ़ी को यह समझना होगा कि आंबेडकर केवल संविधान निर्माता ही नहीं, बल्कि सामाजिक क्रांति के अग्रदूत भी थे। संगोष्ठी में अंबेडकर महासभा के प्रदेश अध्यक्ष प्रमोद कुमार सरोज, मनीष वर्मा, अमरनाथ प्रजापति और डॉ. सत्या दोहरे आदि ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि डॉ. आंबेडकर के सिद्धांतों का पालन ही सच्ची श्रद्धांजलि है। इससे पूर्व उपस्थित लोगों ने डॉ. आंबेडकर के चित्र पर पुष्प अर्पित कर नमन किया। संचालन रामचंद्र पटेल ने किया।