जय गुरूदेव नाम के जयघोष के बीच अयोध्या में मुक्ति दिवस श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाया गया। इस अवसर पर देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और अनुयायी पहुंचे। कार्यक्रम में सद्गुरु दयाल के प्रवचनों ने लोगों को आत्मचिंतन, भक्ति और सत्य के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। प्रवचन के दौरान उन्होंने कहा कि गुरु केवल शरीर नहीं, बल्कि एक दिव्य शक्ति होते हैं। गुरू महाराज थे, गुरू महाराज हैं और गुरू महाराज रहेंगे। उन्होंने बताया कि सच्चे सद्गुरु का कार्य जीवों का आत्मकल्याण करना है और उन्हें उनके “निजधाम” का रास्ता दिखाना है। सद्गुरु दयाल ने अपने संदेश में कहा कि भारत की पावन भूमि, विशेषकर काशी-वाराणसी, संतों और महापुरुषों की जन्मस्थली रही है। इसी परंपरा में एक दिव्य शक्ति के अवतरण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि समय आने पर यह शक्ति देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी “जयगुरूदेव” नाम का प्रकाश फैलाएगी और अंधकार को दूर कर मानवता को नई दिशा देगी। प्रवचन में वर्तमान समय के सत्संगों और धार्मिक आयोजनों पर भी चिंता व्यक्त की गई। उन्होंने कहा कि कहीं-कहीं आध्यात्मिकता के नाम पर बाहरी आडंबर और धन संग्रह की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जबकि वास्तविक उद्देश्य आत्मज्ञान, साधना और नाम की कमाई होना चाहिए। सद्गुरु दयाल ने अनुयायियों से आह्वान किया कि वे सच्चे मार्ग को पहचानें, भ्रम और दिखावे से दूर रहें तथा गुरु के बताए रास्ते पर चलकर अपने जीवन को सार्थक बनाएं। कार्यक्रम में प्रति से आए 500 से अधिक अनुयाई मौजूद रहे।