राजधानी लखनऊ में नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री डॉ. अभिजीत बनर्जी ने बताया कि गरीबी केवल पैसों की कमी का नतीजा नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई जटिल कारण होते हैं। अपनी किताब पुअर इकोनॉमिक्स का हवाला देते हुए बताया कि हर जगह गरीबी का एक जैसा जाल नहीं होता। कई बार सही जानकारी की कमी, मानसिक तनाव और बीमा जैसी सुविधाओं का अभाव लोगों को गरीबी में फंसाए रखता है। पोषण के मामले में उनका शोध बताता है कि आय बढ़ने पर गरीब हमेशा ज्यादा या बेहतर पोषण वाला भोजन ही नहीं लेते, बल्कि स्वाद और सुविधा पर भी खर्च करते हैं। माइक्रोफाइनेंस से कर्ज तो बढ़ता है, लेकिन आम लोगों की जिंदगी में बड़ा बदलाव नहीं आता। हालांकि पहले से कारोबार कर रहे लोगों को इसका फायदा मिलता है। उन्होंने कहा कि भारत में सुविधाएं और इंफ्रा तो हैं, लेकिन डिलीवरी और एक्जीक्यूशन के स्तर पर कमी है।