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बेटी का शव स्कूटी पर ले गए परिजन, तमाशबीन बनी रही भीड़

नीरज नरवरिया Updated Tue, 11 Aug 2026 11:10 PM IST

संवाद न्यूज एजेंसी तालबेहट। हजारिया महादेव मंदिर के समीप मानसरोवर में डूबने से 14 वर्षीय किशोरी छवि की मौत के बाद सामने आया एक दृश्य लोगों को झकझोर गया। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से परिजन बेटी का शव स्कूटी पर रखकर घर ले जाने को मजबूर हुए। आसपास लोगों की भीड़ थी, मंदिर क्षेत्र में श्रद्धालुओं की आवाजाही थी और पुलिस बल भी तैनात था, लेकिन परिवार की मदद के लिए कोई आगे नहीं आया। मंगलवार को नगर में दिनभर घटना को लेकर चर्चा होती रही। लोगों के बीच सवाल उठता रहा कि आखिर ऐसी स्थिति क्यों बनी कि एक परिवार को अपनी मृत बेटी का शव दोपहिया वाहन पर रखकर घर ले जाना पड़ा। घटना ने सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ सामाजिक संवेदनाओं पर भी सवाल खड़े किए हैं। तहसील बार एसोसिएशन के अध्यक्ष हरिराम श्रीवास ने कहा कि घटना बच्चों की बदलती मनोदशा और परिवार के साथ संवाद की जरूरत की ओर भी ध्यान खींचती है। उन्होंने कहा कि माता-पिता की डांट या किसी बात पर रोक-टोक को बच्चे किस तरह ले रहे हैं, इस पर परिवार और समाज दोनों को गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। शिक्षक धर्मेंद्र कुमार ने कहा कि बच्चों की परवरिश में अनुशासन और संवाद दोनों जरूरी हैं। अभिभावक बच्चों की हर जरूरत पूरी करने के लिए अपना जीवन लगा देते हैं। ऐसे में बच्चों के साथ डांट के बजाय संवाद और विश्वास का रिश्ता मजबूत करने की जरूरत है। भीड़ और पुलिस की मौजूदगी के बीच उठे सवाल कारोबारी रामपाल ने कहा कि घटना वाले स्थान पर आम दिनों में भी लोगों की भीड़ रहती है। सावन के दूसरे सोमवार को पूरे क्षेत्र में दिनभर शिवभक्तों की आवाजाही रही। व्यवस्था संभालने के लिए पुलिस बल भी तैनात था। ऐसे में हादसे के बाद परिजनों को किस तरह की सहायता मिली, यह सवाल लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। शव ले जाने की तस्वीर ने झकझोरा घटना का सबसे मार्मिक पहलू वह दृश्य रहा, जब परिजन अपनी बेटी का शव स्कूटी पर लेकर घर की ओर रवाना हुए। जिस बच्ची को कुछ घंटे पहले तक परिवार अपने बीच देख रहा था, उसी का शव इस तरह ले जाने की मजबूरी ने लोगों को विचलित कर दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी परिवार पर दुख का पहाड़ टूटने के बाद समाज की पहली जिम्मेदारी उसके साथ खड़े होने की होती है। परिवार मूल रूप से उरई का रहने वाला है। स्थानीय लोगों के अनुसार, किशोरी के पिता मोमोज का ठेला लगाते हैं। सुलगते सवाल शव ले जाने के लिए परिजनों को वाहन की सुविधा क्यों नहीं मिल सकी? मौके पर मौजूद लोगों ने मदद के लिए हाथ क्यों नहीं बढ़ाया? मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने परिजनों की मदद क्यों नहीं की? सीएचसी प्रशासन की ओर से परिजनों को क्या सहायता उपलब्ध कराई गई? एंबुलेंस की व्यवस्था का प्रावधान नहीं डॉ. वीरेंद्र सिंह, सीएमओ ने बताया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से शव को घर ले जाने के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था का कोई प्रावधान नहीं है।

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