इस देश में अनेक शूरवीर हुए हैं लेकिन उन सभी में जनरल जोरावर सिंह का व्यक्तित्व अनूठा है। भारतीय उपमहाद्वीप में हम सभी ने अनेक शूरवीरों को तारे की तरह चमकते हुए देखा है लेकिन जनरल जोरावर सिंह तारा नहीं बल्कि ध्रुव तारा हैं। 18वीं सदी में माउंटेन वॉरफेयर में जिस प्लानिंग और जिस स्ट्रेटेजी को उन्होंने अपनाया था उसे ही आज सेना अपना रही है। मौजूदा समय में भी उन्हीं के पद चिन्हों पर चलकर युद्ध की तैयारी करती है। यह बातें उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शुक्रवार को कही। वह शहर में जनरल जोरावर चौक पर जम्मू-कश्मीर एक्स सर्विसमैन लीग (जेकेइएसएल) द्वारा जनरल जोरावर की 184वीं पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा को संबोधित कर रहे थे। उनकी मूर्ति पर श्रद्धा सुमन अर्पित करने के पश्चात उन्होंने कहा कि महाराजा गुलाब सिंह के सेनापति जनरल जोरावर ने ही अदम्य वीरता का परिचय देते हुए लद्दाख, तिब्बत, गिलगित, बाल्टिस्तान और स्कर्दू को जीत कर भारत में मिलाया था। तिब्बत में युद्ध लड़ते हुए 12 दिसंबर 1841 वह बलिदान हुए थे।