नागबनी में सोमवार को वैसाखी के दूसरे दिन लगने वाले मेले का भी लोगों ने खूब लुत्फ उठाया। हर वर्ग के लोग पहुंचे। महिलाओं ने जहां खरीदारी की, वहीं बच्चों ने झूलों का आनंद उठाया। वहीं नागदेवता मंदिर के दिनभर लोगों का तांता लगा रहा। मन्नत पूरी होने के बाद लोगों ने ढोल बजा कर खुशी जताई। खानपान सहित बर्तनों, कपड़ों और अन्य सामग्री के स्टाल लगाए गए। लोगों ने प्रसिद्ध नागबनी तालाब में डुबकी लगाई और मंदिर में माथा टेक कर आशीर्वाद लिया। बर्तनों और अन्य सामान की जमकर खरीदारी हुई। मान्यता के अनुसार महाराजा हरि सिंह ने बेटे कर्ण सिंह के जन्म पर मेले की परंपरा शुरू की। इसके साथ ही यह स्थान नाग देवता के नाम से भी जाना जाता है, जहां पर वासुकी नाग देवता के चौथे पुत्र तल्लन नाग देवता की गद्दी है। पुजारी साहिल खजुरिया ने बताया कि प्राचीन मंदिर 200 साल से अधिक पुराना है। लोग दूध और लस्सी और किसान अनाज चढ़ाते हैं। मेला देखने आए दीपक पाण्डेय, चंद्र शर्मा, रोमी देवी ने बताया कि महाराजा हरिसिंह ने बैसाखी के दूसरे दिन मेला आरंभ करवाया था। उन्होंने सरकार से मेले को झिड़ी मेले की तर्ज पर करवाने की मांग की।