लेह एपेक्स बॉडी के कई नेता, जिनमें इसके सह-अध्यक्ष चेरिंग दोरजे लकरूक, जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और लद्दाख के सांसद मोहम्मद हनीफा जान शामिल थे, लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और इसे संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग के समर्थन में चल रही तीन दिवसीय हड़ताल के दूसरे दिन भूख हड़ताल में शामिल हुए। विरोध के अंतिम दिन का समापन करते हुए, सोनम वांगचुक ने स्पष्ट रूप से कहा कि वह एक बड़े विरोध प्रदर्शन की योजना बना रहे हैं, हालांकि तारीख और स्थान की घोषणा केडीए और एलएबी के संबंधित सदस्यों से परामर्श के बाद ही की जाएगी। लेह एपेक्स बॉडी के सदस्य अशरफ अली बरचा ने भी उल्लेख किया कि परम पावन 14वें दलाई लामा के उपदेशों के समापन के बाद लेह में विरोध प्रदर्शन होने की संभावना है। एपेक्स बॉडी के सह-अध्यक्ष चेरिंग दोरजे ने स्पष्ट किया कि लेह एपेक्स बॉडी लद्दाख को राज्य का दर्जा दिए जाने के पूर्ण समर्थन में है और इसके विपरीत कही जा रही किसी भी अफवाह का कोई संबंध नहीं है। एपेक्स बॉडी चाहती है और हमेशा राज्य के दर्जे के पक्ष में खड़ी रही है। शनिवार को शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन सोमवार शाम को समाप्त हुआ। आज का दिन लद्दाख के लिए बहुत ही ऐतिहासिक दिन था क्योंकि कारगिल के इतिहास में पहली बार लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के सदस्य अन्य राजनीतिक नेताओं के साथ एक मंच पर एकता के साथ खड़े थे और चार सूत्री एजेंडे पर जोर दे रहे थे।