नगरी के प्राचीण माता बालासुंदरी मंदिर में श्रीराम नवमी के अवसर पर सामूहिक अनुष्ठान किया गया। हवन पूजन के साथ क्षेत्र की सुख स्मृद्धि की कामना की गई। मंदिर के पुजारी संजू पुरी ने बताया कि मंदिर का पौराणिक महत्व है। पंजाब के एक राजा ने यहां मंदिर का निर्माण करवाया और नवरात्र की नवमी पर हवन अनुष्ठान की परंपरा शुरू की जो चली आ रही है। यह मंदिर जम्मू कश्मीर और पंजाब के सीमावर्ती इलाके में है लिहाजा हर साल नवरात्र में दोनों राज्यों से बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं। इस साल नवरात्र में डेढ़ लाख से ज्यादा भक्तों ने शीष नवाया है।