केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, "भारत की महिलाओं को जो अधिकार देना था, वह नहीं देने पर अगर कांग्रेस जश्न मना रही है तो इससे दुखद कुछ और नहीं हो सकता.भारत की महिलाएं कभी भी कांग्रेस और विपक्ष को माफ नहीं करेंगी.गृह मंत्री ने सदन में कहा कि आपको तकनीकी दिक्कते हैं तो हम संशोधन के लिए तैयार हैं, लिखित में चाहिए तो हम लिखित में भी देने को भी तैयार हैं.कांग्रेस की मंशा साफ थी कि महिलाओं को आरक्षण न मिले.कांग्रेस बेनकाब हो गई है। हम महिलाओं का अधिकार उन्हें दिलाकर रहेंगे। कांग्रेस पार्टी और उनके साथियों ने यह स्थापित कर दिया कि वे महिला विरोधी है.शब्दों से वे अपना पाप साफ नहीं कर सकते। देश की महिलाएं कांग्रेस और उनके साथियों को कभी माफ नहीं करेगी।"
लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन संशोधन विधेयक पर लंबी और गहन चर्चा के बाद शुक्रवार (17 अप्रैल) मतदान प्रक्रिया संपन्न हुई। कुल 528 सांसदों ने वोट डाला, जिसमें 298 सदस्यों ने विधेयक के पक्ष में और 230 ने विपक्ष में मतदान किया। हालांकि, संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत यानी 352 वोट प्राप्त नहीं हो सके। इस पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने घोषणा की कि यह विधेयक आवश्यक समर्थन नहीं जुटा सका, इसलिए आगे की विधायी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जा सकती। इसके बाद संबंधित दो अन्य विधेयकों पर भी सरकार ने मतदान कराने का निर्णय नहीं लिया।
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा, "मुझे लगता है कि अगर प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा सरकार एक सरल महिला आरक्षण विधेयक लाते, जिसमें परिसीमन और जनगणना की कोई शर्त नहीं होती तो महिला आरक्षण बहुत आगे बढ़ जाता। 2023 में महिला आरक्षण का जो कानून पारित हुआ, जिसे सरकार ने कल रात लागू किया उसपर आगे काम होगा लेकिन 2026 में महिला आरक्षण के नाम पर ये जो राजनैतिक परिसीमन करना चाहते थे, वह पूरे देश में उजागर हो गया है.कहीं न कहीं भाजपा को सिर्फ राजनीति करनी है और यह आज देश समझ चुका है