सुषमा स्वराज भगवान कृष्ण की बहुत बड़ी भक्त थीं। उनकी भगवान कृष्ण पर अपार श्रद्धा थी। वह उनके जीवन से इतनी प्रभावित थीं कि कहा जाता है कि वह भगवान की तरह की कई रूपों में अपनी भूमिका निभाना चाहती थीं। इसे आसान शब्दों में समझें तो उन्होंने एक मां, एक बेटी, एक पत्नी, एक राजनीतिज्ञ के रूप में जिंदगी को भरपूर जिया। उनके जीवन में उनकी बेटी बहुत खास स्थान रखती थीं और इसीलिए उसका नामकरण भी उन्होंने सोच समझकर किया। जिस तरह भगवान कृष्ण को उनकी बांसुरी बहुत प्रिय थी सुषमा जी को बेटी भी बहुत प्रिय थी।