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क्या है Semiconductor Mission 2.0? भारत की डिजिटल आजादी का नया रोडमैप | Amar Ujala | Budget 2026

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Updated Sun, 01 Feb 2026 01:46 PM IST

दुनिया अब भारत का नया रूप देख रही है। अब दुनिया सिर्फ बारूद से नहीं, बल्कि एक छोटी सी 'सिलिकॉन चिप' से चलती नजर आई है। जिसको लेकर भारत में भी बड़ा प्लान तैयार हो गया है।  आपके स्मार्टफोन से लेकर देश की सुरक्षा करने वाली मिसाइलों तक सबका दिमाग एक सेमीकंडक्टर चिप में छिपा है। लेकिन अब तक, भारत इस 'दिमाग' के लिए चीन और ताइवान जैसे देशों का मोहताज था. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद के पटल से एक ऐसा एलान किया है, जो भारत को 'डिजिटल गुलाम' से 'डिजिटल सुपरपावर' बना देगा। सरकार ने आधिकारिक तौर पर सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 का शंखनाद कर दिया है। यह सिर्फ एक सरकारी स्कीम नहीं है, बल्कि भारत की 'डिजिटल आजादी' का रोडमैप है। आज की इस विशेष रिपोर्ट में हम समझेंगे कि आखिर क्या है मिशन 2.0 और कैसे यह आपके जीवन और देश की अर्थव्यवस्था को बदलने वाला है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करते हुए सेमिकंडक्टर मिशन को लेकर एक बड़ा एलान किया है। इसके अंतर्गत सरकार सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 की शुरुआत करेगी। यह मिशन देश में मुख्य तौर पर इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट और सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए शुरू किया जाएगा। भारत सरकार का लक्ष्य केवल देश में चिप बनाना ही नहीं है बल्कि दुनिया की सप्लाई चेन में अपनी हिस्सेदारी को मजबूत करना है। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य उन 'मिसिंग लिंक्स' को जोड़ना है जिनकी वजह से भारत अब तक आयात पर निर्भर था।

आपको जानकार हैरानी होगी की अब दौरा ऐसा या गया है की सेमिकंडक्टर बनाने वाली कई कंपनियां देश में अपना प्लांट तैयार कर रही हैं। वर्तमान में भारत अपनी जरूरत के अधिकतर चिप्स चीन और ताइवान से आयात करता है। इस मिशन के जरिए रक्षा, ऑटोमोबाइल और स्मार्टफोन सेक्टर में विदेशी निर्भरता को खत्म किया जा सकेगा। मिशन अगर सफल होता है तो अगले कुछ वर्षों में मेड इन इंडिया चिप्स दुनियाभर के गैजेट्स में नजर आएंगी। बता दे की सेमीकंडक्टर मिशन 1.0 ने भारत में नींव रखी थी, लेकिन 2.0 उस पर एक भव्य इमारत खड़ी करने जा रहा है। इस मिशन का मुख्य केंद्र है इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट और सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को जड़ से मजबूत करना। सरकार का लक्ष्य सिर्फ चिप बनाना नहीं है, बल्कि ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत को एक 'अनिवार्य हिस्सेदार' बनाना है।" सोचिए, आज हम अपने स्मार्टफोन और ऑटोमोबाइल के लिए जो चिप्स इस्तेमाल करते हैं, उनका बड़ा हिस्सा चीन और ताइवान से आता है। अगर कल को वहां तनाव बढ़ता है, तो हमारी पूरी इंडस्ट्री ठप हो सकती है। मिशन 2.0 इस डर को खत्म करने के लिए आया है। चीन पर दुनिया का भरोसा कम हो रहा है और ताइवान पर युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं। ऐसे में पूरी दुनिया 'China Plus One' की तलाश में है। भारत ने मिशन 2.0 के जरिए दुनिया को यह संदेश दिया है कि 'हम तैयार हैं'। ताइवान की बड़ी कंपनियां और अमेरिका की माइक्रोन जैसी दिग्गज कंपनियां पहले ही गुजरात और असम में अपने पैर जमा चुकी हैं। 
 

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