प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को पांच देशों की बहुप्रतीक्षित विदेश यात्रा पर रवाना हो गए। यह यात्रा 2 जुलाई से 9 जुलाई तक चलेगी और इसमें घाना, त्रिनिदाद और टोबैगो, अर्जेंटीना, ब्राजील और नामीबिया शामिल हैं। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत के “ग्लोबल साउथ” के साथ संबंधों को और अधिक गहरा करना तथा सामरिक, सांस्कृतिक और विकासात्मक साझेदारी को मजबूती देना है।
इस यात्रा की शुरुआत अफ्रीकी देश घाना से हुई है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह उनका पहला अफ्रीकी राष्ट्रों में से एक की द्विपक्षीय यात्रा है और यह उनके लिए सम्मान की बात है। उन्होंने कहा, “घाना वैश्विक दक्षिण का एक अहम साझेदार है और अफ्रीकी संघ तथा पश्चिम अफ्रीकी राज्यों के आर्थिक समुदाय (ECOWAS) में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। मैं ऊर्जा, निवेश, स्वास्थ्य, सुरक्षा और विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग को लेकर आशान्वित हूं।”
पीएम मोदी ने यह भी कहा कि घाना की संसद में संबोधन उनके लिए एक विशेष सम्मान होगा। वहीं, कांग्रेस ने इस दौरे के बहाने भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और घाना के पूर्व राष्ट्रपति क्वामे नक्रूमा के ऐतिहासिक संबंधों को याद किया। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि क्वामे नक्रूमा और नेहरू के संबंध घाना की स्वतंत्रता से पहले के थे और दोनों राष्ट्रों के बीच यह ऐतिहासिक जुड़ाव आज भी कायम है।
अकरा की एक प्रमुख सड़क का नाम नेहरू के नाम पर रखा गया है, जबकि नई दिल्ली में क्वामे नक्रूमा मार्ग आज भी इस दोस्ती की याद दिलाता है।
इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी 3-4 जुलाई को त्रिनिदाद और टोबैगो की यात्रा पर रहेंगे। इस देश के साथ भारत का गहरा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रिश्ता रहा है। मोदी ने कहा, “यह यात्रा 180 साल पहले भारत से प्रवास कर वहां बसे भारतीय समुदाय से जुड़ाव को और प्रगाढ़ करने का अवसर है। मैं राष्ट्रपति क्रिस्टीन कंगालू और प्रधानमंत्री कमला परसाद-बिसेसर से मुलाकात करूंगा।”
5 जुलाई को प्रधानमंत्री अर्जेंटीना रवाना होंगे और 6-7 जुलाई को ब्राजील में आयोजित 17वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस सम्मेलन में भारत, ब्राजील, रूस, चीन और दक्षिण अफ्रीका के नेताओं के बीच वैश्विक आर्थिक मुद्दों, तकनीकी सहयोग और सुरक्षा मामलों पर विचार-विमर्श होगा।
इसके बाद मोदी 8-9 जुलाई को नामीबिया की यात्रा पर रहेंगे, जो अफ्रीका के दक्षिणी भाग में स्थित है और भारत के साथ हाल के वर्षों में रक्षा, पर्यावरण और शिक्षा क्षेत्र में निकटता बढ़ी है।
प्रधानमंत्री की यह यात्रा भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ और ‘ग्लोबल साउथ’ नीति को सशक्त करने वाली मानी जा रही है, जो भारत को उभरते वैश्विक नेतृत्व में स्थापित करने की दिशा में एक और बड़ा कदम है।