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West Bengal govt decisions: बंगाल में इमामों-मुअज्जिनों का भत्ता बंद, शुभेंदु अधिकारी की सरकार का बड़ा फैसला!

Tue, 19 May 2026 01:08 AM IST
Bhaskar Tiwari वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम

पश्चिम बंगाल की राजनीति में हाल के दिनों में इमाम और मुअज्जिनों को मिलने वाले सरकारी भत्ते को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया और कुछ राजनीतिक हलकों में यह दावा किया जा रहा है कि Suvendu Adhikari की सरकार ने बंगाल में इमामों और मुअज्जिनों को मिलने वाला भत्ता बंद करने का फैसला लिया है। हालांकि उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार राज्य सरकार की ओर से ऐसा कोई औपचारिक आदेश जारी नहीं किया गया है जिसमें इस योजना को पूरी तरह बंद करने की घोषणा की गई हो। दरअसल, पश्चिम बंगाल में इमामों और मुअज्जिनों को भत्ता देने की योजना कई वर्षों पहले Mamata Banerjee सरकार ने शुरू की थी। इस योजना के तहत इमामों को मासिक आर्थिक सहायता और मुअज्जिनों को अलग भत्ता दिया जाता रहा है। 2023 में राज्य सरकार ने इन भत्तों में बढ़ोतरी भी की थी, जिसके बाद इमामों को लगभग 3,000 रुपये और मुअज्जिनों को 1,500 रुपये प्रतिमाह दिए जाने लगे।

हाल के समय में भाजपा नेताओं ने इस योजना को “तुष्टिकरण की राजनीति” बताते हुए इसकी आलोचना की है। शुभेंदु अधिकारी ने भी कई बार सार्वजनिक मंचों से कहा कि राज्य सरकार धार्मिक आधार पर राजनीति कर रही है और सरकारी धन का इस्तेमाल वोट बैंक मजबूत करने के लिए किया जा रहा है। भाजपा का आरोप है कि राज्य में रोजगार, उद्योग और विकास के मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए इस तरह की योजनाओं का इस्तेमाल किया गया। दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि यह योजना अल्पसंख्यक समुदाय के धार्मिक कर्मियों की आर्थिक सहायता के लिए शुरू की गई थी और सरकार सभी समुदायों के लिए काम कर रही है।

इस मुद्दे की कानूनी पृष्ठभूमि भी काफी महत्वपूर्ण रही है। 2013 में Calcutta High Court ने इमाम और मुअज्जिन भत्ता योजना पर सवाल उठाते हुए कहा था कि यह संवैधानिक प्रावधानों के खिलाफ है और इसे रोकने का निर्देश दिया था। बाद में राज्य सरकार ने योजना के स्वरूप में बदलाव कर इसे वक्फ बोर्ड और अन्य माध्यमों से जारी रखा।

फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि पश्चिम बंगाल में इमामों और मुअज्जिनों का भत्ता पूरी तरह बंद कर दिया गया है। इस विषय पर राजनीतिक बयानबाजी जरूर तेज है, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक अधिसूचना सामने नहीं आई है जिसमें योजना समाप्त करने की पुष्टि हो। इसलिए सोशल मीडिया पर चल रहे कई दावों को सावधानी से देखने की जरूरत है।

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