भाजपा विधायक अग्निमित्रा पॉल ने कहा, "TMC के कार्यकर्ता झंडा दिखा रहे हैं, इसके पीछे कौन है? पुलिस मंत्री, मुख्यमंत्री धरने पर बैठी हैं और TMC के कार्यकर्ता झंडा दिखा रहे हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की Z+ सुरक्षा है लेकिन चाहे ज्ञानेश कुमार हों या राष्ट्रपति, बंगाल में किसी की सुरक्षा नहीं है, अच्छा हुआ वे देख पाए कि बंगाल में क्या स्थिति है। उन्हें व्यवस्था करनी चाहिए कि बंगाल के लोग शांति से वोट दे पाएं लेकिन जब तक TMC है पता नहीं शांति से मतदान हो पाएगा या नहीं। बंगाल के लोग राष्ट्रपति शासन की मांग कर रहे हैं
Agnimitra Paul ने हाल ही में पश्चिम बंगाल की कानून-व्यवस्था और राजनीतिक माहौल को लेकर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में सत्तारूढ़ दल All India Trinamool Congress (TMC) के कार्यकर्ता खुलेआम विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं और झंडे दिखाकर माहौल को तनावपूर्ण बना रहे हैं। अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि सवाल यह है कि इन कार्यकर्ताओं के पीछे कौन है और उन्हें ऐसा करने की अनुमति कौन दे रहा है। उनके अनुसार जब राज्य की पुलिस व्यवस्था सीधे मुख्यमंत्री के अधीन है, तब ऐसी घटनाएँ होना राज्य सरकार की जिम्मेदारी को दर्शाता है। उन्होंने यह भी कहा कि जब खुद मुख्यमंत्री और राज्य की पुलिस मंत्री Mamata Banerjee धरने पर बैठती हैं और उसी समय TMC के कार्यकर्ता विरोध में झंडे दिखाते हैं, तो इससे प्रशासन की निष्पक्षता और नियंत्रण पर गंभीर सवाल उठते हैं।
अग्निमित्रा पॉल ने विशेष रूप से उस घटना का जिक्र किया जिसमें भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar की सुरक्षा को लेकर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को Z+ श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त है, जो देश की सबसे उच्च स्तर की सुरक्षा व्यवस्थाओं में से एक मानी जाती है। इसके बावजूद, यदि पश्चिम बंगाल में उनके दौरे के दौरान इस प्रकार का विरोध और तनावपूर्ण माहौल बनता है, तो यह राज्य की कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बंगाल में स्थिति ऐसी है कि चाहे मुख्य चुनाव आयुक्त हों या फिर देश के राष्ट्रपति, किसी की भी सुरक्षा पूरी तरह सुनिश्चित नहीं दिखाई देती।
भाजपा विधायक ने यह भी कहा कि यह अच्छा हुआ कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने स्वयं बंगाल की जमीनी स्थिति को देखा और समझा। उनके अनुसार बाहर से देखने पर जो स्थिति दिखाई देती है, वास्तविकता उससे कहीं अधिक चिंताजनक हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में राजनीतिक हिंसा और विरोध का माहौल लंबे समय से बना हुआ है और विपक्षी दलों को अक्सर कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। अग्निमित्रा पॉल का कहना है कि यदि चुनाव से जुड़ी संवैधानिक संस्थाओं के शीर्ष पदों पर बैठे लोग भी ऐसे माहौल का अनुभव करते हैं, तो यह चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है।
उन्होंने केंद्र और चुनाव आयोग से यह भी अपेक्षा जताई कि पश्चिम बंगाल की स्थिति पर गंभीरता से ध्यान दिया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि राज्य में लोकतांत्रिक प्रक्रिया बिना किसी डर या दबाव के संचालित हो सके। उनके अनुसार चुनाव के समय प्रशासन को पूरी तरह निष्पक्ष रहना चाहिए और सभी राजनीतिक दलों को समान अवसर मिलना चाहिए। इस बयान के जरिए उन्होंने राज्य सरकार और सत्तारूढ़ दल पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने में विफल रहने का आरोप लगाया और कहा कि बंगाल में लोकतांत्रिक माहौल को सुरक्षित रखना अत्यंत आवश्यक है।