चुनावों में टिकट के लिए पाला यानि पार्टी बदलना कोई नई बात नहीं है। लेकिन मुश्किल तब खड़ी होती है जब नए दल के लिए प्रचार करने पहुंचे हों और जुबां पर न सिर्फ पिछली पार्टी का नाम आए बल्कि अपील भी उसे ही जिताने की हो जाए। ऐसा ही कुछ हुआ चुनावों से पहले तक अखिलेश के पाले में रहे नारद राय के साथ। जो हाल ही में साइकिल से उतरकर हाथी पर 'सवार' हो गए।