फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

UP Final Voters List 2026: UP में SIR की फाइनल लिस्ट जारी, भाजपा पर भड़के विपक्षी दल, दागे कई सवाल!

Sat, 11 Apr 2026 01:50 AM IST
Bhaskar Tiwari वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम

उत्तर प्रदेश में SIR की फाइनल सूची जारी होने के बाद सियासी माहौल गरमा गया है। उत्तर प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी सरकार द्वारा जारी इस सूची को लेकर विपक्षी दलों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं और पारदर्शिता पर निशाना साधा है। विपक्ष का आरोप है कि चयन प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई हैं, कई योग्य अभ्यर्थियों के नाम सूची से गायब हैं, जबकि कुछ ऐसे नाम शामिल किए गए हैं जिनकी पात्रता संदिग्ध बताई जा रही है। समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और अन्य दलों के नेताओं ने इसे युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करार दिया है और कहा है कि सरकार को पूरी चयन प्रक्रिया सार्वजनिक करनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।

विपक्षी नेताओं का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की शिकायतें पहले भी उठती रही हैं, लेकिन सरकार ने उन्हें नजरअंदाज किया। अब जब फाइनल सूची सामने आई है, तो इन आशंकाओं को और बल मिला है। उन्होंने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, संभव हो तो न्यायिक जांच बैठाई जाए, ताकि दोषियों पर कार्रवाई हो सके। साथ ही, अभ्यर्थियों को उनका हक मिले और चयन प्रक्रिया में विश्वास बहाल हो।

दूसरी ओर, भाजपा और सरकार के प्रवक्ताओं ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि पूरी प्रक्रिया नियमों और पारदर्शिता के साथ पूरी की गई है और किसी भी प्रकार की धांधली का सवाल ही नहीं उठता। सरकार का दावा है कि विपक्ष केवल राजनीतिक लाभ के लिए मुद्दे को तूल दे रहा है और युवाओं को भ्रमित करने की कोशिश कर रहा है।

इस मुद्दे ने प्रदेश की राजनीति को फिर से गर्म कर दिया है, खासकर ऐसे समय में जब रोजगार और भर्ती जैसे विषय पहले से ही संवेदनशील बने हुए हैं। अब देखना होगा कि सरकार विपक्ष के आरोपों का किस तरह जवाब देती है और क्या इस मामले में कोई जांच या पुनर्विचार होता है या नहीं।.

उत्तर प्रदेश में SIR (संभवतः “शिक्षक भर्ती/सेवा चयन” या संबंधित प्रक्रिया) की फाइनल सूची जारी होने के बाद सियासी माहौल गरमा गया है। उत्तर प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी सरकार द्वारा जारी इस सूची को लेकर विपक्षी दलों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं और पारदर्शिता पर निशाना साधा है। विपक्ष का आरोप है कि चयन प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई हैं, कई योग्य अभ्यर्थियों के नाम सूची से गायब हैं, जबकि कुछ ऐसे नाम शामिल किए गए हैं जिनकी पात्रता संदिग्ध बताई जा रही है। समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और अन्य दलों के नेताओं ने इसे युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करार दिया है और कहा है कि सरकार को पूरी चयन प्रक्रिया सार्वजनिक करनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।

विपक्षी नेताओं का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की शिकायतें पहले भी उठती रही हैं, लेकिन सरकार ने उन्हें नजरअंदाज किया। अब जब फाइनल सूची सामने आई है, तो इन आशंकाओं को और बल मिला है। उन्होंने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, संभव हो तो न्यायिक जांच बैठाई जाए, ताकि दोषियों पर कार्रवाई हो सके। साथ ही, अभ्यर्थियों को उनका हक मिले और चयन प्रक्रिया में विश्वास बहाल हो।

दूसरी ओर, भाजपा और सरकार के प्रवक्ताओं ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि पूरी प्रक्रिया नियमों और पारदर्शिता के साथ पूरी की गई है और किसी भी प्रकार की धांधली का सवाल ही नहीं उठता। सरकार का दावा है कि विपक्ष केवल राजनीतिक लाभ के लिए मुद्दे को तूल दे रहा है और युवाओं को भ्रमित करने की कोशिश कर रहा है।

इस मुद्दे ने प्रदेश की राजनीति को फिर से गर्म कर दिया है, खासकर ऐसे समय में जब रोजगार और भर्ती जैसे विषय पहले से ही संवेदनशील बने हुए हैं। अब देखना होगा कि सरकार विपक्ष के आरोपों का किस तरह जवाब देती है और क्या इस मामले में कोई जांच या पुनर्विचार होता है या नहीं।

विज्ञापन

Latest

Recommended

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
AU ऐप में पढ़ें