UNSC की एक आपात बैठक हुई, जिसमें अमेरिका द्वारा ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले पर चर्चा की गई। इस बैठक में रूस, चीन और पाकिस्तान ने एक प्रस्ताव रखा जिसमें मिडिल-ईस्ट में तुरंत और बिना शर्त युद्धविराम की मांग की गई। जानें इसपर पाकिस्तान ने क्या कहा। पाकिस्तान ने हमले से एक दिन पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को शांति का नोबेल पुरस्कार देने की आधिकारिक सिफ़ारिश की थी. इसके पीछे तर्क दिया गया कि ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान निर्णायक कूटनीति की और अहम नेतृत्व दिखाया, जिससे युद्ध के मुहाने पर खड़े दोनों देशों के बीच शांति स्थापित हुई. वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान इसराइल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष में खुलकर इसराइल का विरोध और ईरान का समर्थन कर रहा था. ईरान पर अमेरिका के हमले के बाद उत्तर कोरिया भी विरोध में आ गया है. उत्तर कोरिया ने अमेरिकी हमले की निंदा की है. उत्तर कोरिया ने इजरायल और अमेरिका पर मध्य पूर्व में तनाव बढ़ाने का आरोप लगाया. उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने अमेरिकी हवाई हमलों पर प्योंगयांग की पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया में कहा कि उत्तर कोरिया अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से अमेरिका और इजराइल की निंदा करने का आह्वान करता है. वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने सोमवार को कहा कि उनका देश ईरान पर अमेरिकी हमले का समर्थन करता है. ऑस्ट्रेलिया उन कुछ अमेरिकी सहयोगियों में से एक है, जो हमले का पूरी तरह से समर्थन करता है. इस पर कई लोगों ने चिंता व्यक्त की है. संयुक्त राष्ट्र में कार्यवाहक अमेरिकी राजदूत डोरोथी शीया ने बैठक में बोलते हुए कहा कि अमेरिकी बलों ने ईरान की परमाणु संवर्धन क्षमता को "नष्ट" करने और "आतंकवाद के दुनिया के सबसे प्रमुख राज्य प्रायोजक" द्वारा उत्पन्न परमाणु खतरे को रोकने के उद्देश्य से रविवार को हमला किया.