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TMC Split: Mamata से क्यों नाराज है Saayoni Ghosh? ये है बगावत की असल कहानी! Saayoni Ghosh vs Mamata

अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Updated Thu, 11 Jun 2026 08:27 PM IST

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक और बड़ा नाम तृणमूल कांग्रेस के लिए मुश्किलें बढ़ा सकता है। कभी ममता बनर्जी की सबसे भरोसेमंद युवा नेताओं में गिनी जाने वालीं और तृणमूल युवा कांग्रेस की अध्यक्ष सायोनी घोष अब पार्टी छोड़ने की अटकलों के केंद्र में हैं। खबरें हैं कि सायोनी घोष उन सांसदों के संपर्क में हैं जो टीएमसी नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं। इतना ही नहीं, दिल्ली में भाजपा नेताओं और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ उनकी कथित मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में हलचल और तेज कर दी है। दिलचस्प बात यह है कि विधानसभा चुनाव में हार के बाद जब टीएमसी संगठन संकट से गुजर रही थी, तब ममता बनर्जी ने सायोनी घोष पर भरोसा जताते हुए उन्हें बड़ा संगठनात्मक पद सौंपा था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या सायोनी घोष भी ममता का साथ छोड़ने जा रही हैं? और अगर ऐसा है तो आखिर ममता की किस बात से नाराज हो गईं TMC की स्टार कैम्पैनर? चलिए समझते है सायोनी के कथित बगावत की पूरी कहानी। 

पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों उथल-पुथल का दौर जारी है। विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर शुरू हुई असंतोष की लहर अब पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। पहले विधायकों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के बगावती तेवर सामने आए, फिर राज्यसभा सांसदों के इस्तीफों ने पार्टी को झटका दिया। अब लोकसभा सांसदों के एक बड़े समूह के पार्टी से अलग होने की अटकलों ने ममता बनर्जी की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। इन चर्चाओं के केंद्र में टीएमसी की युवा और चर्चित सांसद सायोनी घोष का नाम सबसे आगे है। 

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सायोनी घोष जल्द ही टीएमसी के बागी खेमे में शामिल हो सकती हैं। इन अटकलों को तब और बल मिला जब खबर सामने आई कि वह कुछ अन्य सांसदों के साथ दिल्ली में भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर हुई एक बैठक में शामिल हुई थीं। खबरों की माने तो दावा किया जा रहा है कि इस बैठक में माला रॉय समेत अन्य सांसद भी मौजूद थे। सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर है कि बैठक के दौरान पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी वहां पहुंचे थे। हालांकि, इन मुलाकातों को लेकर किसी भी पक्ष की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। अगर वाकई ये मुलाकात हुई है तो इसके कई राजनीतिक मायने निकाले जा सकते हैं। इस चर्चा को बल और भी ज्यादा इसलिए मिल रहा क्योंकि कल देर शाम न्यूज एजेंसी IANS पर TMC के 19 बागी सांसदों के नाम की एक लिस्ट सामने आती है। उस लिस्ट में सायोनी घोष का नाम भी था। उसी रात से जुड़ी अब ये खबर सामने आई की सायोनी घोष समेत कुछ सांसदों की भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर एक बैठक हुई। 

सायोनी घोष का नाम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि विधानसभा चुनाव में हार के बाद जब पार्टी संगठन संकट से जूझ रही थी, तब ममता बनर्जी ने उन पर भरोसा जताते हुए बड़ा दायित्व सौंपा था। जून के पहले सप्ताह में संगठनात्मक फेरबदल के दौरान सायोनी घोष को दोबारा तृणमूल युवा कांग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। उस समय इसे ममता बनर्जी द्वारा युवा नेतृत्व पर भरोसा जताने और पार्टी के वफादार चेहरों को आगे बढ़ाने के संकेत के रूप में देखा गया था।

लेकिन अब सामने आ रही खबरें अलग कहानी बयां कर रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सायोनी घोष लंबे समय से पार्टी नेतृत्व से नाराज चल रही थीं। उनके करीबी सूत्रों का दावा है कि चुनाव प्रचार के दौरान जब वह विरोधियों और जनता के निशाने पर आईं, तब पार्टी ने उन्हें अपेक्षित राजनीतिक और संगठनात्मक समर्थन नहीं दिया। बताया जा रहा है कि उस दौर में उन्होंने खुद को अकेला और उपेक्षित महसूस किया। यही नाराजगी धीरे-धीरे उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच दूरी का कारण बन गई।

इस बीच, टीएमसी के भीतर उभरे बागी गुट की गतिविधियां भी लगातार तेज होती जा रही हैं। इस गुट की अगुवाई कर रहीं काकोली घोष दस्तीदार पहले ही 20 से अधिक सांसदों के समर्थन का दावा कर चुकी हैं। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि कई चर्चित सांसद इस गुट के संपर्क में हैं। सायोनी घोष, माला रॉय, शत्रुघ्न सिन्हा और यूसुफ पठान जैसे नामों को लेकर लगातार अटकलें लगाई जा रही हैं। यदि इनमें से कुछ सांसद भी खुलकर बागी खेमे के साथ खड़े होते हैं, तो यह टीएमसी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका साबित हो सकता है।

दिलचस्प बात यह है कि चुनाव से पहले सायोनी घोष ममता बनर्जी को राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका दिलाने की खुलकर वकालत कर रही थीं। उन्होंने कई मंचों से ममता बनर्जी को प्रधानमंत्री पद का मजबूत दावेदार बताया था। चुनाव नतीजों के बाद भी उन्होंने सार्वजनिक रूप से पार्टी के साथ खड़े रहने की बात कही थी। लेकिन अब उनके संभावित राजनीतिक कदम को लेकर चर्चाओं ने बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।

इसी बीच, टीएमसी और कांग्रेस के संभावित पुनर्गठन या विलय की अटकलों ने भी राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। हाल ही में दिल्ली में ममता बनर्जी की कांग्रेस नेतृत्व के साथ मुलाकात और अभिषेक बनर्जी की राहुल गांधी से अलग बैठक के बाद राजनीतिक विश्लेषकों ने नए समीकरणों की संभावना जताई। हालांकि, टीएमसी से बागी हुए विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने ऐसी सभी चर्चाओं को खारिज करते हुए कहा है कि कोई भी विधायक कांग्रेस में शामिल होने नहीं जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि उनके साथ विधायकों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन कांग्रेस में विलय का सवाल ही नहीं उठता।

ममता बनर्जी की चुप्पी ने भी इन अटकलों को और हवा दी है। दिल्ली दौरे से लौटने के बाद जब उनसे कांग्रेस में संभावित पुनर्विलय को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया और सीधे वहां से निकल गईं।

फिलहाल पश्चिम बंगाल की राजनीति एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है। एक तरफ टीएमसी अपने सबसे बड़े संगठनात्मक संकट से जूझ रही है, तो दूसरी तरफ बागी नेताओं की बढ़ती सक्रियता पार्टी नेतृत्व की चिंताओं को बढ़ा रही है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि क्या सायोनी घोष और अन्य सांसद वास्तव में ममता बनर्जी का साथ छोड़ते हैं या फिर यह सियासी दबाव की रणनीति भर है। आने वाले दिनों में इसका जवाब बंगाल ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति की दिशा भी तय कर सकता है।

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