क्या बिहार की धरती पर कांग्रेस का नया राजनीतिक अध्याय शुरू होगा या यह बैठक भी आंतरिक कलह और टिकट बंटवारे की गुत्थियों में उलझकर रह जाएगी? पटना में पहली बार कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक होने जा रही है और इस ऐतिहासिक मौके ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। लेकिन इस बैठक के समानांतर सदाकत आश्रम में हंगामे की आशंका ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है।
देशभर से 150 से ज्यादा शीर्ष नेता पटना पहुंच रहे हैं। बैठक का मकसद साफ है बिहार में पार्टी को मजबूत करना और लोकसभा चुनाव में दिखी कमजोरियों को दूर करना। खासकर उन क्षेत्रों में, जहां कांग्रेस पिछली बार मजबूती के बावजूद प्रभावी दावेदारी नहीं कर पाई। कांग्रेस इसे एक बड़े जनाधार विस्तार का मौका मान रही है।
बिहार कांग्रेस का प्रदेश मुख्यालय, सदाकत आश्रम, पिछले एक साल से कई बार हंगामे और मारपीट का गवाह रहा है। टिकट बंटवारे को लेकर कार्यकर्ताओं में असंतोष गहराता रहा है। अब जब कार्यसमिति की बैठक हो रही है, तो माहौल और ज्यादा संवेदनशील हो गया है। प्रदेश नेतृत्व को अंदेशा है कि टिकटार्थियों की भीड़ किसी भी वक्त नाराजगी जताते हुए हंगामा खड़ा कर सकती है।
कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सभी 243 सीटों से ऑनलाइन आवेदन मंगवाए थे। हजारों कार्यकर्ताओं और नेताओं ने उम्मीद के साथ नामांकन किया। लेकिन अबतक स्क्रीनिंग की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई है। अक्टूबर के अंत में चुनाव की अधिसूचना जारी होने की संभावना है और नवंबर में मतदान तय माना जा रहा है। ऐसे में टिकट की आस लगाए नेताओं का धैर्य जवाब देने लगा है।
यही वजह है कि पार्टी के अंदर असंतोष चरम पर है। नेताओं का आरोप है कि सीट बंटवारे में देरी जानबूझकर की जा रही है और “सेटिंग” का खेल चल रहा है।
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी बैठक में शामिल होंगे। प्रदेश नेतृत्व को डर है कि राहुल गांधी की मौजूदगी में ही टिकटार्थी या असंतुष्ट गुट अपनी नाराजगी सड़क पर दिखा सकते हैं। प्रदेश कांग्रेस ने सुरक्षा व्यवस्था और अनुशासन बनाए रखने के लिए विशेष जिम्मेदारी तय कर दी है।
सूत्रों के अनुसार, नाराज गुट राहुल गांधी तक तीन बड़े नामों की शिकायत पहुंचाने की तैयारी में हैं। उनका आरोप है कि स्क्रीनिंग कमेटी के नाम पर पुराने कार्यकर्ताओं और अगड़े नेताओं को दरकिनार किया जा रहा है।
प्रदेश प्रभारी कृष्णा अल्लावरु पर आरोप है कि वे टिकट वितरण में निष्पक्ष नहीं हैं। वहीं प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम से भी कई टिकटार्थी नाराज हैं। कांग्रेस कार्यसमिति सदस्य और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह को लेकर भी असंतोष है।
कुछ नेताओं का कहना है कि 70 सीटों पर कांग्रेस ने चुनावी तैयारी पहले ही शुरू कर दी थी, लेकिन अब वहां भी टिकट की उम्मीद धुंधली हो रही है। कई टिकटार्थियों का आरोप है कि प्रदेश नेतृत्व जानबूझकर कुछ समूहों को प्राथमिकता दे रहा है, जबकि वर्षों से काम कर रहे नेताओं को हाशिए पर धकेला जा रहा है।
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले इस तरह की आंतरिक कलह कांग्रेस की रणनीति को कमजोर कर सकती है। पार्टी को उम्मीद थी कि कार्यसमिति की बैठक से संगठन को मजबूती मिलेगी और कार्यकर्ताओं में नया उत्साह आएगा। लेकिन टिकट बंटवारे में असंतोष ने इस उम्मीद पर सवाल खड़ा कर दिया है।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यदि कांग्रेस ने सीटों पर जल्द निर्णय नहीं लिया तो पार्टी के दावेदार अन्य गठबंधनों या दलों की ओर रुख कर सकते हैं। यह सीधे-सीधे कांग्रेस की चुनावी स्थिति को कमजोर करेगा।
कांग्रेस कार्यसमिति की पटना बैठक अब सिर्फ बिहार में संगठन को मजबूत करने की कवायद नहीं रह गई है, बल्कि यह पार्टी की अनुशासन और नेतृत्व क्षमता की भी परीक्षा है। राहुल गांधी और शीर्ष नेतृत्व को न सिर्फ चुनावी रणनीति पर फोकस करना होगा, बल्कि गुटबाजी और असंतोष को भी शांत करना होगा।
सवाल यही है क्या पटना की बैठक कांग्रेस को बिहार में नई मजबूती देगी या टिकटार्थियों की नाराजगी और सदाकत आश्रम का हंगामा पार्टी की राह और कठिन बना देगा?