जैसा कि हर चुनाव के बाद होता है, हारी हुई पार्टी इस कोशिश में रहती है कि कैसे जीती हुई पार्टी की खेमेबाजी और कुर्सी की जंग को हवा दी जाए, कर्नाटक में भी वैसा ही हो रहा है। इसमें सबके लिए रोल मॉडल बने हुए हैं सचिन पायलट जिन्होंने राजस्थान में अपनी ही सरकार के खिलाफ लंबे समय से मोर्चा खोल रखा है। कर्नाटक में भी यही कोशिश शुरु से हो रही है कि प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार और विपक्ष के नेता रहे पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बीच कैसे दरार पैदा की जाए, कैसे मुख्यमंत्री को लेकर इनकी महत्वाकांक्षाओं को सतह पर लाया जाए। 63 साल के डीके शिवकुमार जिस तरह भावुक हुए और जिस तरह उन्होंने सिद्धारमैया समेत केन्द्रीय नेतृत्व और पार्टी कार्यकर्ताओं का आभार जताया, उसे महसूस किया जाना चाहिए।