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Sonam Wangchuk Supports CJP: ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को सोनम वांगचुक ने दिया समर्थन

Sat, 23 May 2026 07:06 PM IST
Adarsh Jha अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम

पर्यावरणविद और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया पर चल रहे ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) आंदोलन का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने खुद को इस अभियान का ‘मानद कॉकरोच’ बताते हुए सरकार से युवाओं की आवाज सुनने और उनकी चिंताओं को गंभीरता से लेने की अपील की।

यह ऑनलाइन आंदोलन इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है। आंदोलन से जुड़े युवा बेरोजगारी, पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी और जवाबदेही जैसे मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ व्यंग्यात्मक तरीके से अपनी बात रख रहे हैं। इस अभियान में ‘कॉकरोच’ को प्रतीक के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। आंदोलन से जुड़े लोगों का दावा है कि उनके सोशल मीडिया अकाउंट बंद किए जा रहे हैं और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उन्हें दबाने की कोशिश हो रही है।

पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में वांगचुक ने कहा कि लोकतंत्र में ऐसे अभियानों को खतरे की तरह नहीं बल्कि जनता के फीडबैक की तरह देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि युवाओं ने अपनी बात रखने के लिए हिंसा नहीं बल्कि रचनात्मक डिजिटल माध्यम चुना है, जो लोकतंत्र के लिए सकारात्मक संकेत है।

वांगचुक ने कहा, “मैं युवाओं की इस रचनात्मकता से बहुत प्रभावित हूं। सरकार को संदेश समझना चाहिए, संदेश देने वाले को खत्म नहीं करना चाहिए। अगर संदेश देने वाले को दबाया जाएगा, तो भी संदेश खत्म नहीं होगा।”

जब उनसे पूछा गया कि क्या वह इस आंदोलन में औपचारिक रूप से शामिल होंगे, तो उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा, “मैं इसकी सदस्यता के योग्य नहीं हूं, क्योंकि मैं न बेरोजगार हूं और न ही आलसी। लेकिन मैं खुद को इसका मानद कॉकरोच जरूर मानता हूं।”

वांगचुक ने इस पूरे अभियान की तुलना अखबारों में छपने वाले राजनीतिक कार्टूनों से की। उन्होंने कहा कि जैसे नेताओं और सरकारों पर व्यंग्य लोकतंत्र का हिस्सा माना जाता है, वैसे ही सोशल मीडिया पर इस तरह की अभिव्यक्ति को भी सकारात्मक दृष्टि से देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक लोकतंत्र में आलोचना और व्यंग्य को दबाने के बजाय उससे सीखने की जरूरत होती है।

उन्होंने कहा कि भारत के युवाओं ने विरोध जताने के लिए पत्थर या हिंसा का रास्ता नहीं चुना, बल्कि डिजिटल रचनात्मकता के जरिए अपनी बात रखी। यही चीजें भारत को मजबूत लोकतंत्र बनाती हैं और ‘विश्वगुरु’ बनने की दिशा में आगे बढ़ाती हैं।

वांगचुक ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ऑनलाइन अभिव्यक्ति को लगातार दबाया गया, तो युवाओं में गुस्सा बढ़ सकता है। उन्होंने नेपाल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां इंटरनेट बंद करने और आवाज दबाने की कोशिशों के बाद युवा सड़कों पर उतर आए थे और हालात हिंसक हो गए थे।

उन्होंने पेपर लीक जैसे मामलों को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि कई देशों में ऐसे मामलों पर मंत्री तक इस्तीफा दे देते हैं। उनके मुताबिक युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर संवेदनशीलता और जवाबदेही बेहद जरूरी है।

अंत में वांगचुक ने सरकार और युवाओं दोनों से संयम बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं को किसी कोने में धकेलने की कोशिश न करे और युवाओं को भी हमेशा शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर युवाओं की आवाज समय रहते सुन ली जाए, तो उनका गुस्सा सड़कों तक पहुंचने से रोका जा सकता है।

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