SIR पर समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय ने कहा, "मैंने मऊ में अधिकारियों के साथ मीटिंग की। SIR के नाम पर जो कुछ भी किया जा रहा है, हम उसे स्वीकार नहीं करेंगे। इतने सारे BLO ने आत्महत्या कर लिया है। 2003 की वोटर लिस्ट गायब है। अगर वे ऐसे गलत तरीकों से सत्ता में आना चाहते हैं, तो हम इसका विरोध करेंगे.
समाजवादी पार्टी (सपा) ने उत्तर प्रदेश में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) यानी मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर गंभीर आपत्ति जताई है और इसे लेकर मुख्य निर्वाचन अधिकारी को शिकायत पत्र भी लिखा है। सपा के प्रमुख नेता, अखिलेश यादव, ने इस प्रक्रिया पर तीखे आरोप लगाते हुए कहा है कि यह वोट काटने की साजिश है, जिसका उद्देश्य उन विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं के नाम हटाना है जहाँ सपा या INDIA गठबंधन ने पिछले चुनावों में जीत हासिल की थी। उन्होंने यह आशंका भी व्यक्त की है कि भारतीय जनता पार्टी और चुनाव आयोग मिलकर एसआईआर के बहाने हर विधानसभा में 50,000 से अधिक वोट काटने की तैयारी कर रहे हैं। अखिलेश यादव ने बिहार विधानसभा चुनाव के रुझानों को भी एसआईआर से जोड़ते हुए कहा था कि वहाँ एसआईआर ने 'खेल' किया, लेकिन वे उत्तर प्रदेश में ऐसा नहीं होने देंगे।
समाजवादी पार्टी ने निर्वाचन आयोग से एसआईआर की अंतिम तिथि को कम से कम तीन महीने बढ़ाने की मांग की है। उनका तर्क है कि कम समय सीमा के कारण कई मामलों की जाँच अधूरी रह जाती है और यह प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी नहीं हो पाएगी।पार्टी ने मुजफ्फरनगर और झांसी सहित कई जिलों में एसआईआर अभियान के दौरान गड़बड़ियों की शिकायत की है। आरोप लगाया गया है कि बीएलओ (बूथ लेवल अधिकारी) द्वारा मतदाताओं पर दबाव बनाया जा रहा है और मतदाता सूचियाँ गलत तरीके से अपलोड की गई हैं।सपा ने लखनऊ पूर्वी विधानसभा से करीब 1100 मतदाताओं के लापता होने का आरोप लगाया है, जिनके नाम सूची में नहीं मिल रहे हैं। सपा ने यह भी मांग की है कि गणना प्रपत्र घर-घर जाकर वितरित किए जाएं ताकि कोई भी पात्र मतदाता छूट न जाए।
कुल मिलाकर, समाजवादी पार्टी एसआईआर प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठा रही है और इसे आगामी चुनावों से पहले विपक्षी गठबंधन के वोटों को प्रभावित करने की एक राजनीतिक साजिश बता रही है, जिसके विरोध में वे संवैधानिक संस्थाओं तक संघर्ष करने की बात कह रहे हैं।