पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान को खत्म करने के लिए पार्टी नेतृत्व अब पूरी तरह सक्रिय हो गया है। प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल ने नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा को नाराज नेताओं से बातचीत कर विवाद सुलझाने की जिम्मेदारी सौंपी है। दूसरी ओर, अनुशासनहीनता पर पार्टी ने सख्त रुख अपनाते हुए एक पूर्व विधायक को कारण बताओ नोटिस भी जारी कर दिया है।
चंडीगढ़ पहुंचते ही प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल सीधे कांग्रेस भवन जाने के बजाय नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा के आवास पहुंचे। करीब 45 मिनट तक चली बैठक में दोनों नेताओं ने पार्टी के भीतर जारी मतभेदों पर विस्तार से चर्चा की। बैठक के बाद बाजवा ने बताया कि वरिष्ठ नेता होने के नाते पार्टी को एकजुट रखना उनकी भी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जिन नेताओं के बीच मतभेद हैं, वे सभी उनके संपर्क में हैं और अगले पांच दिनों में सभी की बघेल से अलग-अलग मुलाकात कराई जाएगी।
बाजवा के मुताबिक, भूपेश बघेल ने भरोसा दिलाया है कि सभी नेताओं की नाराजगी दूर करने की कोशिश की जाएगी। यदि किसी नेता को विधानसभा क्षेत्रों या संगठनात्मक फैसलों को लेकर कोई गलतफहमी है तो उसे भी स्पष्ट किया जाएगा। बाजवा ने उम्मीद जताई कि इस सप्ताह के भीतर अधिकांश विवाद सुलझ जाएंगे। यदि किसी मुद्दे पर सहमति नहीं बनती है तो संबंधित नेताओं की मुलाकात कांग्रेस हाईकमान से भी कराई जाएगी।
इसी बीच, कांग्रेस नेतृत्व ने केंद्रीय स्तर पर भी स्थिति पर नजर बनाए रखी है। प्रियंका गांधी की ओर से भेजी गई दो वरिष्ठ नेताओं की टीम ने पंजाब पहुंचकर प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल से मुलाकात की और मौजूदा हालात पर विस्तृत चर्चा की। टीम अब दिल्ली लौट चुकी है और अपनी रिपोर्ट पार्टी हाईकमान को सौंपेगी। वहीं, भूपेश बघेल भी पंजाब दौरे के बाद अपनी अलग रिपोर्ट केंद्रीय नेतृत्व को भेजेंगे। माना जा रहा है कि इन फीडबैक के आधार पर आगे की रणनीति तय होगी।
विवाद के बीच कांग्रेस ने अनुशासनहीनता पर भी सख्त संदेश दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने साफ कहा है कि कोई भी नेता ऐसा बयान न दे जो पार्टी अनुशासन के खिलाफ हो। इसी क्रम में पंजाब कांग्रेस की अनुशासन समिति के अध्यक्ष अवतार हेनरी ने घनौर के पूर्व विधायक मदन लाल जलालपुर को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में उन पर पार्टी हाईकमान, केसी वेणुगोपाल और भूपेश बघेल के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां करने का आरोप लगाया गया है। उनसे तीन दिन के भीतर जवाब मांगा गया है, अन्यथा अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
उधर, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने सोशल मीडिया पर अपने समर्थक नेताओं की तस्वीर साझा करते हुए "एकता में बल है" का संदेश दिया। हालांकि वे न तो भूपेश बघेल से मिले और न ही कोई औपचारिक बातचीत की। चन्नी के इस संदेश के राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं, क्योंकि उनके समर्थक प्रदेश नेतृत्व में बदलाव और चन्नी को बड़ी जिम्मेदारी देने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में चुनाव से पहले पंजाब कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठनात्मक एकता बनाए रखने की है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि भूपेश बघेल और प्रताप सिंह बाजवा की सुलह की पहल पार्टी के अंदरूनी मतभेदों को कितना खत्म कर पाती है।