राहुल गांधी ने शुक्रवार को उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में आयोजित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में युवाओं, शिक्षा, रोजगार, सरकारी नौकरियों और पेपर लीक जैसे मुद्दों को केंद्र में रखते हुए केंद्र सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम किसी राजनीतिक रैली के रूप में नहीं, बल्कि देश के छात्रों और युवाओं की वास्तविक समस्याओं, उनके संघर्ष और भविष्य पर खुली चर्चा के उद्देश्य से आयोजित किया गया है। राहुल गांधी ने अपने संबोधन में कहा कि आज भारत के सामने सबसे बड़ा सवाल युवाओं के भविष्य का है और यदि शिक्षा व्यवस्था कमजोर होगी तो देश का विकास भी प्रभावित होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की शिक्षा प्रणाली लगातार पेपर लीक की घटनाओं से संकट में है और अब तक लगभग 7.5 करोड़ छात्र किसी न किसी रूप में इससे प्रभावित हो चुके हैं। उनके अनुसार, मेहनत से पढ़ाई करने वाले लाखों छात्र कुछ प्रभावशाली लोगों की वजह से नुकसान उठा रहे हैं।
राहुल गांधी ने दावा किया कि पेपर लीक की घटनाओं के पीछे केवल कुछ चुनिंदा लोग हैं, जिन्हें धन और सत्ता का संरक्षण प्राप्त है। उन्होंने कहा कि लगभग 1 प्रतिशत लोग पैसे और पहुंच के बल पर परीक्षा प्रश्नपत्र लीक कराने का काम करते हैं, जबकि 99 प्रतिशत ईमानदार, मेहनती और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों का भविष्य दांव पर लग जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में पेपर लीक की समस्या इतनी गंभीर हो चुकी है कि विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए कथित रूप से "मेन्यू कार्ड" तक उपलब्ध हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि परीक्षा प्रणाली में संगठित भ्रष्टाचार और अनियमितताएं गहराई तक पहुंच चुकी हैं। राहुल गांधी ने कहा कि ऐसी घटनाओं से युवाओं का सरकारी संस्थाओं पर भरोसा कमजोर होता है और उनकी वर्षों की मेहनत एक झटके में बेकार हो जाती है।
अपने भाषण में राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े चार प्रमुख अन्यायों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पहला अन्याय शिक्षा की बढ़ती लागत है, जिसके कारण गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करना कठिन होता जा रहा है। दूसरा अन्याय यह है कि युवाओं के लिए अवसरों के अधिकांश दरवाजे बंद हो चुके हैं और सीमित अवसरों के कारण प्रतियोगिता लगातार कठिन होती जा रही है। तीसरा अन्याय यह है कि बड़ी संख्या में छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन बहुत कम अभ्यर्थियों को सफलता मिल पाती है। चौथा और सबसे गंभीर अन्याय उन्होंने पेपर लीक को बताया, जिसे उन्होंने शिक्षा व्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा कहा। राहुल गांधी ने कहा कि इस समस्या का समाधान तभी संभव है जब पेपर लीक के कारणों की ईमानदारी से जांच हो, दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए, परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाया जाए तथा छात्रों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं का भविष्य सुरक्षित रखना सरकार और समाज दोनों की साझा जिम्मेदारी है।