उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा, "वैश्विक संकट के समय देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निर्देश नहीं दिया है अपील की है। इसलिए मैं पहले भी कहता था राहुल गांधी और अखिलेश यादव को देशद्रोही तो नहीं कह सकता लेकिन देशभक्ति पर संदेह होने लगता है कि ये भारत की ओर से बोलते हैं या भारत के दुश्मनों की ओर से बोलते हैं समझ नहीं आता। ऐसी भाषा देश नहीं स्वीकार करेगा।"
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री Keshav Prasad Maurya ने हाल ही में कांग्रेस नेता Rahul Gandhi और समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जब देश वैश्विक संकट और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से गुजर रहा है, तब सभी राजनीतिक दलों और नेताओं को राष्ट्रीय हित में एकजुट होकर सरकार और देश का समर्थन करना चाहिए। केशव प्रसाद मौर्य ने प्रधानमंत्री Narendra Modi का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने किसी को निर्देश नहीं दिया, बल्कि देशहित में सहयोग और एकता की अपील की है। इसके बावजूद विपक्षी नेताओं के बयान ऐसे दिखाई देते हैं जिससे उनकी देशभक्ति पर सवाल खड़े होने लगते हैं। मौर्य ने कहा कि वह राहुल गांधी और अखिलेश यादव को देशद्रोही नहीं कह सकते, लेकिन उनके बयानों और रवैये को देखकर यह समझना मुश्किल हो जाता है कि वे भारत के पक्ष में बोल रहे हैं या फिर भारत के विरोधियों की भाषा बोल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि देश की जनता ऐसे वक्त में राजनीतिक स्वार्थ की राजनीति पसंद नहीं करती और राष्ट्रीय सुरक्षा तथा देश की प्रतिष्ठा से जुड़े मामलों पर विपक्ष को जिम्मेदारी से व्यवहार करना चाहिए। मौर्य ने आरोप लगाया कि विपक्ष लगातार ऐसे बयान देता है जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश होती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया में मजबूत स्थिति में खड़ा है और सरकार हर संकट का मजबूती से सामना कर रही है। ऐसे समय में विपक्ष को सरकार की आलोचना करने के बजाय देशहित में सहयोग करना चाहिए।
उपमुख्यमंत्री ने आगे कहा कि भारतीय जनता पार्टी राष्ट्रवाद और विकास की राजनीति करती है, जबकि कुछ विपक्षी दल केवल भ्रम फैलाने और राजनीतिक लाभ लेने में लगे रहते हैं। उन्होंने दावा किया कि जनता सब देख रही है और आने वाले समय में इसका जवाब भी देगी। मौर्य के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी और तेज हो गई है। भाजपा नेताओं ने उनके बयान का समर्थन किया, जबकि विपक्षी दलों ने इसे राजनीतिक हमला बताते हुए कहा कि भाजपा असली मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोकसभा चुनाव और राष्ट्रीय मुद्दों के बीच इस तरह के बयान आने वाले दिनों में राजनीतिक माहौल को और गर्म कर सकते हैं।