बिहार में बंद सभी चीनी मिलें फिर से खोल दी जाएंगी। यानि बिहार में बंपर रोजगार मिलेगा। ये एलान किया है नीतीश कैबिनेट ने। बिहार में नई सरकार के गठन के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य के औद्योगिक पुनरुद्धार को लेकर बड़ा ऐलान किया है. मुख्यमंत्री ने कहा है कि बिहार की सभी बंद पड़ी चीनी मिलों को दोबारा चालू किया जाएगा और नई मिलों की स्थापना के लिए नई पॉलिसी तैयार की जा रही है. उनका कहना है कि चीनी मिलों को चालू करने से न केवल गन्ना किसानों की आय में वृद्धि होगी बल्कि स्थानीय स्तर पर बड़ी संख्या में रोजगार भी मिलेंगे. बीच में खबर ये आई थी कि गन्ना उद्योग विभाग ने सकरी और रैयाम चीनी मिल की संपत्तियों का पूनर्मूल्यांकन कराने का फैसला लिया है. इसके लिए जल्द ही सर्वे शुरू होगा. गन्ना उद्योग विभाग ने एसबीआई कैप्स, कोलकाता के जरिए पुनर्मूल्यांकन का निर्णय लिया है.
बिहार में दरअसल कई चीनी मिलें रही हैं। ये अलग-अलग समय में बंद हुईं। उत्तर बिहार के एक इलाके में, 16 चीनी मिलों में से 9 चीनी मिलें बंद हो चुकी थीं। मुजफ्फरपुर का मोतीपुर शुगर मिल) मोतीपुर मिल 2011 के आसपास लंबे समय से बंद है। इधर नवादा का वारिसालिगंज चीनी मिल 1990 में बंद घोषित है। अगर बिहार की बंद पड़ी सभी चीनी मिले चालू हो जाती हैं तो गन्ने की फसल में किसानों को सीधे पैसा मिलता है। इससे ग्रामीण इलाकों की खरीद क्षमता बढ़ती है।