मालेगांव ब्लास्ट मामले में न्यायालय के निर्णय के बाद से कांग्रेस पर हमलावर भाजपा ने एटीएस के पूर्व अधिकारी महबूब मुजावर के बयान को भी आधार बनाकर गंभीर आरोप लगाए हैं। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा के मुताबिक मुजावर ने खुलासा किया है कि मालेगांव ब्लास्ट मामले की जांच के दौरान उन पर दबाव बनाया गया था कि झूठा केस बनाकर सरसंघचालक मोहन भागवत को गिरफ्तार करें और भगवा आतंकवाद का फर्जी नैरेटिव बनाएं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने 17 वर्षों तक सेना, संत, सनातन और संविधान पर हमला किया।संबित पात्रा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने ''भगवा आतंकवाद'' का नैरेटिव फैलाने की कोशिश की और विशेष रूप से गांधी परिवार हिंदुओं को अपमानित करना चाहता था। यह सब तुष्टिकरण की राजनीति और वोटबैंक के लालच का नतीजा था।
आरोप लगाया कि गांधी परिवार की तीव्र इच्छा रही है कि सनातन संस्कृति और हिंदू समाज पर कुठाराघात किया जाए। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि मालेगांव बम धमाका मामले में गठित की गई जांच समिति में अहम भूमिका निभाने वाले एटीएस के पूर्व अधिकारी महबूब मुजावर ने एक महत्वपूर्ण खुलासा किया है। पात्रा के अनुसार उस समय एटीएस के शीर्ष अधिकारी और तत्कालीन सरकार के कुछ प्रभावशाली लोगों ने महबूब मुजावर पर दवाब बनाया था कि किसी भी कीमत पर भगवा आतंकवाद के नैरेटिव को आगे बढ़ाएं और आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत को गिरफ्तार करें। महबूब के इससे इन्कार करने पर उनके ही वरिष्ठ अधिकारियों ने उन पर झूठे और गंभीर आरोप लगाए। उनकी पदोन्नति रोक दी गई। बाद में महबूब न्यायालय गए, जहां अदालत ने उन्हें पूरी तरह निर्दोष ठहराया।
भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि यह प्रकरण साफ दर्शाता है कि किस तरह तत्कालीन कांग्रेस सरकार और उसके प्रभाव में काम कर रही एजेंसियों ने भगवा आतंकवाद के फर्जी नैरेटिव को स्थापित करने के लिए सारी हदें पार कर दी थीं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने बयान दिया है- आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता। यह कांग्रेस की तुष्टीकरण की राजनीति का वर्षों पुराना तकिया कलाम है। इसके अलावा पूर्व गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने भी कांग्रेस के एक सम्मेलन में पहली बार भगवा आतंकवाद शब्द का इस्तेमाल किया था।