नीट-यूजी 2026 परीक्षा को लेकर उठे सवाल अब सिर्फ छात्रों तक सीमित नहीं रहे हैं। जंतर-मंतर पर चल रहा आंदोलन अब राजनीतिक रंग भी पकड़ चुका है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है। इतना ही नहीं, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक ऐसा सुझाव दिया है, जिसने सियासी हलकों में नई बहस छेड़ दी है। आखिर क्या है पूरा मामला?
नीट-यूजी 2026 परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक विवाद को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर युवाओं के नेतृत्व में चल रहे विरोध प्रदर्शन और पर्यावरणविद तथा शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक के आमरण अनशन को अब राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है।
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल गुरुवार को प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंचे। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा और कहा कि यदि युवाओं की आवाज और इस आंदोलन को नजरअंदाज किया गया, तो आने वाले चुनावों में सरकार को इसकी बड़ी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।
केजरीवाल ने अपने संबोधन में कहा कि केंद्र सरकार को छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से लेना चाहिए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सरकार ने समय रहते इस मुद्दे का समाधान नहीं किया, तो आगामी चुनावों में उसका वही हाल हो सकता है, जैसा 2014 में तत्कालीन सरकार का हुआ था।
इस दौरान केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक अलग तरह का राजनीतिक सुझाव भी दिया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को उनके पद से हटाया जाना चाहिए और उनकी जगह शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक को देश का नया शिक्षा मंत्री बनाया जाना चाहिए।
उधर, सोनम वांगचुक का जंतर-मंतर पर आमरण अनशन गुरुवार को 19वें दिन में प्रवेश कर गया। वांगचुक का कहना है कि जब तक शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय नहीं होती, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता नहीं आती और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका अनशन जारी रहेगा।
इसी बीच वांगचुक की बिगड़ती सेहत को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका पर भी गुरुवार को महत्वपूर्ण सुनवाई हुई।
चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की खंडपीठ ने कहा कि हर नागरिक का जीवन अनमोल है और सरकार की जिम्मेदारी है कि उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करे।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य की जंतर-मंतर पर रोजाना क्लीनिकल मॉनिटरिंग की जाए। यदि सरकारी डॉक्टरों को किसी भी तरह के चिकित्सकीय हस्तक्षेप की आवश्यकता महसूस हो, तो बिना देरी के उन्हें आवश्यक इलाज उपलब्ध कराया जाए।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को भरोसा दिलाया कि डॉक्टरों और चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम पहले से ही रोजाना वांगचुक के स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त मेडिकल टीम भी तैनात की जाएगी।
सरकार के इस आश्वासन के बाद हाईकोर्ट ने जनहित याचिका का निपटारा कर दिया।
अब इस पूरे मामले ने शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है। एक ओर छात्र और प्रदर्शनकारी पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी ओर विपक्ष इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर लगातार हमलावर है।
नीट विवाद अब सिर्फ परीक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह शिक्षा व्यवस्था, राजनीतिक जवाबदेही और छात्रों के भविष्य का बड़ा मुद्दा बन चुका है। अब देखना होगा कि सरकार इस बढ़ते दबाव के बीच क्या कदम उठाती है और क्या आंदोलन तथा सियासत के बीच कोई समाधान निकल पाता है।