कर्नाटक की नई सरकार के गठन के बीच मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जी परमेश्वर ने आखिरकार अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। मुख्यमंत्री बनने की चर्चाओं और अटकलों के बीच उपमुख्यमंत्री पद मिलने पर उन्होंने किसी भी तरह की नाराजगी या असंतोष की खबरों को खारिज कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि पार्टी नेतृत्व ने जो जिम्मेदारी उन्हें सौंपी है, उसे उन्होंने पूरी खुशी और सम्मान के साथ स्वीकार किया है।
कर्नाटक की राजनीति में लंबे समय से प्रभावशाली भूमिका निभाने वाले जी परमेश्वर को मुख्यमंत्री पद का प्रमुख दावेदार माना जा रहा था। लेकिन कांग्रेस हाईकमान ने डीके शिवकुमार को राज्य की कमान सौंपने का फैसला किया। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या परमेश्वर इस फैसले से संतुष्ट हैं। अब खुद परमेश्वर ने सामने आकर इन सभी अटकलों पर विराम लगा दिया है।
पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि उनके अनुभव और योगदान को कम करके नहीं आंका गया है। उन्होंने कहा कि उनके साथ किसी भी तरह का अन्याय नहीं हुआ है और पार्टी ने उन्हें एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। उनके अनुसार, उपमुख्यमंत्री का पद भी राज्य और जनता की सेवा करने का एक बड़ा अवसर है।
जी परमेश्वर ने स्वीकार किया कि मुख्यमंत्री बनने की इच्छा उनके मन में भी थी। उन्होंने कहा, “हां, मेरी भी इच्छा थी कि मैं मुख्यमंत्री बनूं, लेकिन कांग्रेस एक अनुशासित पार्टी है और हाईकमान का फैसला हमारे लिए सर्वोपरि होता है। पार्टी जो निर्णय लेती है, उसे स्वीकार करना हमारा कर्तव्य है। हम पार्टी के अनुशासित सिपाही हैं और अनुशासन का पालन करना ही हमारा धर्म है।”
उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व के प्रति आभार जताते हुए कहा कि ऐसे समय में उन पर भरोसा जताकर उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी देना उनके लिए सम्मान की बात है। उन्होंने कहा कि यह पद केवल एक राजनीतिक नियुक्ति नहीं, बल्कि राज्य के विकास और जनता की सेवा का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
परमेश्वर ने यह भी स्पष्ट किया कि वह किसी पद को प्रतिष्ठा या शक्ति के नजरिए से नहीं देखते। उनके मुताबिक, किसी भी सार्वजनिक पद का असली महत्व इस बात में है कि उसके माध्यम से लोगों की कितनी सेवा की जा सकती है। उन्होंने कहा कि पद का नाम महत्वपूर्ण नहीं होता, बल्कि उससे मिलने वाला जनसेवा का अवसर ज्यादा मायने रखता है।
कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि वह पार्टी की विचारधारा और चुनावी वादों को आगे बढ़ाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि नई सरकार जनता की उम्मीदों पर खरी उतरेगी और विकास के नए मानक स्थापित करेगी।
इस दौरान जी परमेश्वर ने मुख्यमंत्री बनने जा रहे डीके शिवकुमार को बधाई भी दी। उन्होंने कहा कि सरकार गठन की पूरी प्रक्रिया में दोनों नेता शामिल थे और सभी फैसले पार्टी नेतृत्व के मार्गदर्शन में लिए गए। उन्होंने उम्मीद जताई कि शिवकुमार के नेतृत्व में सरकार मजबूती से काम करेगी और कांग्रेस के एजेंडे को प्रभावी तरीके से लागू करेगी।
जब उनसे पूछा गया कि उन्हें कौन सा विभाग मिलने की संभावना है, तो उन्होंने कहा कि अभी इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि उन्हें जो भी विभाग सौंपा जाएगा, वह उसे पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ संभालेंगे। उनके लिए विभाग से ज्यादा महत्वपूर्ण जनता की सेवा और सरकार की सफलता है।
कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री पद की दौड़ में पीछे रहने के बावजूद जी परमेश्वर ने अपने बयान से यह संदेश देने की कोशिश की है कि कांग्रेस नेतृत्व के फैसले पर उन्हें पूरा भरोसा है। उन्होंने न केवल पार्टी अनुशासन का उदाहरण पेश किया है, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया है कि नई सरकार में उनकी भूमिका सक्रिय और महत्वपूर्ण रहने वाली है।