जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रदर्शन को लेकर जांच एजेंसियां विदेशी फंडिंग, वित्तीय लेन-देन और सोशल मीडिया कैंपेन की जांच कर रही हैं। पांच से ज्यादा कंपनियां जांच के दायरे में हैं, जिनमें डिजिटल मार्केटिंग और इंफ्लूएंसर से जुड़ी कंपनियां भी शामिल हैं। मुंबई, बेंगलुरु, गुरुग्राम और दिल्ली में कई ठिकानों पर छापेमारी कर दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस जब्त किए गए हैं। जांच में संदिग्ध वित्तीय लेन-देन, एआई एडिटेड वीडियो और भ्रामक पोस्ट के जरिए प्रधानमंत्री और मंत्रियों की छवि खराब करने की कोशिश के संकेत मिले हैं। करीब 2,000 संदिग्ध सोशल मीडिया अकाउंट की पहचान हुई है, जिनमें लगभग 700 भारत में संचालित बताए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक कई इंफ्लूएंसर्स को प्रति पोस्ट 40 हजार से 80 हजार रुपये तक भुगतान किए जाने की भी जांच हो रही है। कुछ पूर्व पत्रकार और यूट्यूबर भी जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। वहीं, पश्चिम बंगाल एसटीएफ ने गिरफ्तार जैश-ए-मोहम्मद के संदिग्ध आतंकी हामिम मंडल से पूछताछ के आधार पर दावा किया है कि उसने जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस की वर्दी पहनकर हिंसा और तोड़फोड़ की साजिश रची थी। जांच एजेंसियां इस पूरे मामले में सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं।