फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Jantar Mantar Protest: सौरव दास और जेपी नड्डा के बीच क्या हुई बात? CJP Protest | Sonam Wangchuk

अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Updated Mon, 20 Jul 2026 04:41 PM IST

सड़क पर लाठीचार्ज संसद के बाहर प्रदर्शन और सत्ता के गलियारों में अचानक शुरू हुई बातचीत। आखिर ऐसा क्या हुआ कि आंदोलन की अगुवाई कर रहे प्रदर्शनकारियों को सीधे केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के घर बुलाया गया? क्या सरकार और आंदोलनकारियों के बीच समझौते की शुरुआत हो चुकी है, या फिर टकराव अभी बाकी है? चलिए आपको बताते हैं आंदोलन के सबसे अहम मोड़ की ये पूरी कहानी।

दिल्ली की सड़कों पर नारे गूंज रहे थे। संसद की ओर बढ़ते प्रदर्शनकारियों को पुलिस रोक रही थी। कई जगह धक्का-मुक्की और बल प्रयोग की खबरें सामने आ रही थीं। ऐसा लग रहा था कि आंदोलन और सरकार के बीच टकराव और गहराएगा। लेकिन तभी कहानी ने अचानक नया मोड़ ले लिया।

कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP ने दावा किया कि सरकार ने खुद बातचीत के लिए संपर्क किया। संगठन के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के आवास पर बुलाया गया। करीब दो घंटे के इंतजार के बाद दोनों नेताओं की मंत्री से मुलाकात हुई। हालांकि मुलाकात सिर्फ दस मिनट चली, लेकिन आंदोलन की दिशा बदलने के लिए इतना समय भी काफी माना जा रहा है।

मुलाकात के बाद सौरभ दास ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि उन्होंने जेपी नड्डा को संगठन की मांगों से जुड़ा एक लिखित ज्ञापन सौंपा है। उनके मुताबिक, केंद्रीय मंत्री ने आश्वासन दिया कि इन मांगों पर सरकार के भीतर चर्चा की जाएगी। हालांकि दास ने यह भी कहा कि बातचीत का समय बेहद कम रहा और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की खबरें भी सामने आ रही हैं।

दिलचस्प बात यह रही कि इस मुलाकात के साथ ही CJP ने अपनी मांगों का दायरा भी बढ़ा दिया। पहले आंदोलन दो प्रमुख मांगों पर केंद्रित था, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और कथित परीक्षा अनियमितताओं से जुड़े मामलों में आत्महत्या करने वाले नीट अभ्यर्थियों के परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा। लेकिन अब तीसरी और नई मांग भी सामने आ गई सफदरजंग अस्पताल में भर्ती सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को तत्काल रिहा किया जाए।

उधर, बातचीत का दौर चल रहा था तो दूसरी ओर संसद मार्ग पर प्रदर्शनकारी आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे। हजारों छात्र और युवा कथित परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ जवाबदेही तय करने और अपनी मांगों के समर्थन में संसद की ओर मार्च कर रहे थे। सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही कड़ी थी। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेड लगाए और कई स्थानों पर बल प्रयोग किए जाने के आरोप भी लगे। इन घटनाओं ने राजधानी का माहौल और अधिक तनावपूर्ण बना दिया।

इसी उथल-पुथल के बीच आंदोलन से जुड़ी एक और बड़ी खबर सामने आई। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपना अनशन समाप्त कर दिया। उन्होंने यह अनशन तब शुरू किया था, जब सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से अस्पताल ले जाया गया था। लगभग पचास घंटे तक भूख हड़ताल पर रहने के बाद दीपके ने अपना अनशन खत्म किया, लेकिन यह भी स्पष्ट कर दिया कि आंदोलन अभी समाप्त नहीं हुआ है।

अब पूरा घटनाक्रम एक अहम मोड़ पर खड़ा है। एक तरफ सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत की शुरुआत हो चुकी है, दूसरी ओर प्रदर्शन जारी है और मांगें भी पहले से ज्यादा स्पष्ट और व्यापक हो गई हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है क्या यह दस मिनट की मुलाकात किसी बड़े समाधान की शुरुआत बनेगी, या फिर संसद और सड़क के बीच यह संघर्ष आने वाले दिनों में और तेज होगा? फिलहाल, इसकी नजरें सरकार के अगले कदम और बातचीत के नतीजों पर टिकी हैं।
 

Latest

विज्ञापन

Recommended

विज्ञापन
Next
एप में पढ़ें