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CJP Protest Jantar Mantar: सोनम वांगचुक को अस्पताल से मिलेगी छुट्टी? Sansad । Dharmendra Pradhan

अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Updated Mon, 20 Jul 2026 03:07 PM IST

क्या सोनम वांगचुक अब अस्पताल से निकलकर सीधे संसद मार्च में शामिल होंगे? क्या उनकी सेहत अब पूरी तरह ठीक है, जैसा कि उन्होंने खुद दावा किया है? और आखिर क्यों संसद सत्र के पहले ही दिन दिल्ली पुलिस ने पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में बदल दिया? 

संसद के मानसून सत्र के पहले दिन राजधानी दिल्ली में आंदोलन और सुरक्षा के बीच टकराव का माहौल देखने को मिला। सफदरजंग अस्पताल में भर्ती सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अस्पताल प्रशासन से उन्हें छुट्टी देने की अपील की है ताकि वे कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के 'संसद चलो' मार्च में शामिल हो सकें।

सोनम वांगचुक ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर साझा किए गए पत्र में लिखा कि वह अब पूरी तरह स्वस्थ महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके स्वास्थ्य से जुड़े सभी मेडिकल पैरामीटर सामान्य हैं और इसलिए उन्हें, भले ही कुछ समय के लिए, अस्पताल से बाहर जाने की अनुमति दी जाए ताकि वह संसद तक निकाले जा रहे मार्च में शामिल हो सकें। उन्होंने अस्पताल प्रशासन से इस अनुरोध पर सकारात्मक निर्णय लेने की अपील भी की।

गौरतलब है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और पेपर लीक जैसे मामलों में जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर सोनम वांगचुक जंतर-मंतर पर आमरण अनशन कर रहे थे। 18 जुलाई को अनशन के 21वें दिन उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वांगचुक और उनके समर्थकों ने इसे नजरबंदी बताया है, जबकि प्रशासन का कहना है कि स्वास्थ्य संबंधी कारणों और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उन्हें अस्पताल ले जाया गया।

इधर, वांगचुक अस्पताल में हैं तो उधर CJP के कार्यकर्ता संसद की ओर मार्च निकालने के अपने कार्यक्रम पर कायम हैं। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके और अन्य नेताओं के नेतृत्व में प्रदर्शनकारी संसद की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। इस बीच, पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास को दिल्ली पुलिस डीसीपी कार्यालय ले गई। सौरव दास ने कहा कि प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत जारी है और उन्हें उम्मीद है कि बातचीत के जरिए समाधान निकलेगा।

इससे पहले संसद की ओर मार्च कर रहे सैकड़ों छात्रों और युवा कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उन्हें तितर-बितर करने के लिए हल्का लाठीचार्ज किया गया। हालांकि, पुलिस की ओर से इस संबंध में तत्काल कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

दिल्ली पुलिस ने पहले ही एडवाइजरी जारी कर स्पष्ट किया है कि संसद क्षेत्र के आसपास जुलूस, रैली और पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर प्रतिबंध लागू है। हालांकि, पूर्व अनुमति के साथ जंतर-मंतर के निर्धारित प्रदर्शन स्थल पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति दी जा सकती है। मानसून सत्र के मद्देनजर संसद भवन और नई दिल्ली के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था और अधिक सख्त कर दी गई है। अतिरिक्त पुलिस बल, बैरिकेडिंग और निगरानी व्यवस्था के जरिए किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने की तैयारी की गई है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अस्पताल प्रशासन सोनम वांगचुक को मार्च में शामिल होने की अनुमति देगा? क्या सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत किसी समाधान तक पहुंचेगी? और क्या संसद के भीतर उठने वाली बहस सड़क पर जारी आंदोलन की दिशा बदल पाएगी? इन सवालों के जवाब पर अब सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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